सरकार ने बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मृत व्यक्तियों के 2.5 करोड़ से ज्यादा आधार नंबर डीएक्टिवेट कर दिए गए हैं। इसका मकसद आधार से होने वाली किसी भी तरह की धोखाधड़ी को रोकना है।
लोकसभा में मंत्री ने दी जानकारी
इस बड़े सफाई अभियान की जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को लोकसभा में दी। उन्होंने बताया कि यह कदम आधार डेटाबेस को सटीक और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
मंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार नंबर सक्रिय रहना गलत इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकता है। इसलिए आधार नंबर को समय पर बंद करना जरूरी है, ताकि फर्जी पहचान और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोका जा सके।
134 करोड़ के करीब हैं सक्रिय आधार धारक
सरकार के मुताबिक देश में करीब 134 करोड़ सक्रिय आधार कार्ड धारक हैं। ऐसे में रिकॉर्ड को अपडेट रखना एक बड़ी चुनौती है। कई बार मृत्यु का पंजीकरण किसी और स्थान पर होता है, जबकि आधार कार्ड पर पता अलग दर्ज होता है। इसी वजह से पूरे देश में यह अभियान चलाया गया।
यह कदम इस बात को सुनिश्चित करने के लिए है कि सरकारी सब्सिडी और सुविधाओं का लाभ केवल सही और जीवित लाभार्थियों को ही मिले।
सिस्टम सुरक्षा के लिए तकनीकी उपाय भी
पुराने और गलत रिकॉर्ड हटाने के साथ-साथ सरकार ने आधार सिस्टम की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी उपाय भी किए हैं।
इनमें बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक फीचर शामिल है, जिससे यूजर अपने फिंगरप्रिंट और आंखों की जानकारी को लॉक कर सकते हैं। इससे किसी भी तरह के अनधिकृत ऑथेंटिकेशन को रोका जा सकता है।















