संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। बजट पेश होने के बाद से ही सदन सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा है। इस बीच विपक्षी दलों ने लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपा है, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक, इस नोटिस पर फैसला होने तक ओम बिरला ने सदन में न जाने का निर्णय लिया है।
ओम बिरला ने दिए नोटिस की जांच के आदेश
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को स्पीकर ओम बिरला ने महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि विपक्ष द्वारा सौंपे गए नोटिस की जांच की जाए और उचित कार्रवाई की जाए।
विपक्ष का आरोप क्या है?
विपक्षी दलों का कहना है कि स्पीकर ओम बिरला ने सदन को पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित किया, कांग्रेस सांसदों पर झूठे आरोप लगाए और अपने पद का दुरुपयोग किया। विपक्ष ने कहा कि वे व्यक्तिगत तौर पर लोकसभा अध्यक्ष का सम्मान करते हैं, लेकिन लगातार उनकी आवाज दबाने के प्रयासों से अत्यंत आहत हैं।
कितने सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए?
नोटिस कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने महासचिव को सौंपा। इस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के 100 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए। नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत सौंपा गया है।
















