लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ सरकार विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकती है। इस संबंध में उन्हें नोटिस जारी कर शाम 5 बजे तक जवाब देने को कहा गया है। सत्ता पक्ष ने लोकसभा में दिए गए उनके भाषण के कुछ हिस्सों पर तीखी आपत्ति जताई है, जिसके बाद सदन का माहौल गरमा गया।
‘एप्स्टीन फाइल्स’ का जिक्र बना विवाद की वजह
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में ‘एप्स्टीन फाइल्स’ का उल्लेख किया। हालांकि, आसन पर बैठे जगदंबिका पाल द्वारा टोके जाने पर उन्होंने कहा कि वे एप्स्टीन का नाम नहीं लेंगे। इसके बावजूद इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
अडानी और अंबानी पर टिप्पणी
भाषण के दौरान राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी का नाम लेते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बजट में अडानी का प्रभाव नजर आता है। राहुल ने यह भी कहा कि अमेरिका में अडानी के खिलाफ दायर मुकदमा असल में भारत के प्रधानमंत्री को निशाना बनाने की कोशिश है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बीजेपी के वित्तीय नेटवर्क को टारगेट किया है। इसके अलावा उन्होंने उद्योगपति अनिल अंबानी का जिक्र करते हुए कहा कि उनका नाम कथित रूप से एप्स्टीन फाइल्स में होने के कारण उन्हें जेल नहीं भेजा गया।
हरदीप सिंह पुरी पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए पूछा कि उन्हें एप्स्टीन से किसने मिलवाया। इस बयान पर भी सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया गया है और जरूरत पड़ने पर उनसे सदन में आरोपों के सबूत मांगे जाएंगे।
बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान को संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताया। पार्टी प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है और इस तरह के आरोप परंपराओं को ठेस पहुंचाते हैं।
हरदीप सिंह पुरी का जवाब
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी निभाने वाले और सिर्फ भाषण देने वाले नेताओं में फर्क होता है।
पुरी ने स्पष्ट किया कि जेफरी एप्स्टीन के साथ उनकी बातचीत का किसी भी आरोप से कोई संबंध नहीं था। उनका मुख्य संपर्क लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से था, जिन्हें उन्होंने भारत आने का निमंत्रण दिया था।
उन्होंने कहा कि लाखों ईमेल में उनका नाम सिर्फ तीन-चार बार आया। वे कुछ मौकों पर प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में एप्स्टीन से मिले थे और केवल एक ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था। बातचीत ‘मेक इन इंडिया’ जैसे विषयों पर केंद्रित थी और उनका एप्स्टीन के कथित अपराधों से कोई लेना-देना नहीं है।
पुरी ने यह भी कहा कि उन्हें एप्स्टीन की गतिविधियों में कोई रुचि नहीं थी और राहुल गांधी को तथ्यों की पूरी जानकारी लेकर बयान देना चाहिए।
















