बिहार में बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते असर को लेकर सरकार गंभीर नजर आ रही है। Facebook, Instagram और Snapchat जैसे प्लेटफॉर्म पर बढ़ते स्क्रीन टाइम को देखते हुए राज्य सरकार नई पॉलिसी तैयार करने की योजना बना रही है। इस बात की जानकारी राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा सत्र के दौरान दी।
NIMHANS से मांगी गई रिपोर्ट
सम्राट चौधरी ने बताया कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को समझने के लिए NIMHANS, बेंगलुरु से विस्तृत रिपोर्ट मंगाई गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। सरकार बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग पर नजर रखने के लिए ठोस कदम उठाने की तैयारी में है।
पॉलिसी बनाने की तैयारी
विधानसभा में बोलते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि यह एक बहु-आयामी मुद्दा है, जिसमें कई विभाग और पक्ष शामिल होंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। इसके बाद कानून बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाया जा सकता है।
विधानसभा में उठा मुद्दा
विधानसभा सत्र के दौरान जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ने आर्थिक सर्वे 2025-26 का हवाला देते हुए बच्चों में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में सरकार ने पॉलिसी लाने की बात कही है।
दूसरे राज्यों और देशों के उदाहरण
बिहार से पहले गोवा में भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नियंत्रण के लिए कानून बनाने की चर्चा हो चुकी है। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया था।
बढ़ती लत बनी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। हाल ही में गाजियाबाद में ऑनलाइन गेमिंग के कारण तीन बहनों की मौत का मामला सामने आया था, जिसने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।
सरकार का मानना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे में बिहार की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन सकती है।
















