सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च पर सीमा तय करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। यह याचिका गैर-सरकारी संगठन Common Cause की ओर से दायर की गई है, जिसमें चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा अनियंत्रित धन के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए छह हफ्ते का समय तय किया है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा धनबल का अंधाधुंध इस्तेमाल लोकतंत्र की बुनियाद को प्रभावित करता है और चुनावी प्रक्रिया को असंतुलित करता है। उन्होंने याद दिलाया कि इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह मान चुका है कि अनियंत्रित धनबल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को विकृत करता है और मतदाताओं के सूचना अधिकार को प्रभावित करता है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जोय माल्या बागची ने धनबल के दुरुपयोग को रोकने में व्यावहारिक चुनौतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देशों में भी चुनावी खर्च की सीमाएं हैं, लेकिन वहां भी उम्मीदवारों के मित्र, सहयोगी या तीसरे पक्ष के माध्यम से खर्च की समस्या बनी रहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया कि वह अत्यधिक चुनावी खर्च पर अंकुश लगाने के लिए एसओपी में नए उपायों पर विचार करे। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के सुझावों को भी विचारणीय बताया, हालांकि तीसरे पक्ष की रिपोर्टों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि चुनाव आयोग ने कई रिपोर्टों का खंडन किया है।
पीठ में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोय माल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारी शामिल थे।
















