समंदर सिर्फ एक खूबसूरत नजारा नहीं, बल्कि एक ऐसा एहसास है जो दिमाग को शांत करना सिखाता है। इसी एहसास को साइंस की भाषा में ‘ब्लू माइंड थेरेपी’ कहा जाता है। यानी जब हम पानी के करीब होते हैं—जैसे समंदर, नदी, झील या बारिश—तो हमारा दिमाग अपने आप रिलैक्स मोड में चला जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी के बहाव को देखना, उसकी आवाज सुनना या हल्की बारिश में टहलना दिमाग को तरोताजा कर देता है। अगर बाहर जाना संभव न हो, तो घर में छोटा फाउंटेन या एक्वेरियम भी वही सुकून दे सकता है।
‘ब्लू माइंड’ वह स्थिति है, जहां दिमाग में शांति, फोकस और रचनात्मकता बढ़ती है। इस दौरान ब्रेन में रिलैक्सेशन से जुड़ी अल्फा वेव्स सक्रिय होती हैं और सेरोटोनिन व डोपामाइन जैसे ‘फील गुड’ हार्मोन बढ़ते हैं। यानी पानी के आसपास रहना एक तरह से प्राकृतिक मेडिटेशन जैसा असर देता है।
इसके विपरीत ‘रेड माइंड’ की स्थिति में तनाव, जल्दबाजी और ज्यादा सोच हावी रहती है। लगातार स्क्रीन टाइम, शोर और भागदौड़ दिमाग को इसी मोड में रखती है, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
ऐसे में ‘ब्लू माइंड’ इस तनाव भरे माहौल से बाहर निकलने का एक आसान तरीका बन सकता है। जब दिमाग इस अवस्था में जाता है, तो न सिर्फ मानसिक स्थिति बेहतर होती है, बल्कि शरीर पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। दिल की धड़कन सामान्य रहती है, ब्लड प्रेशर संतुलित होता है और नींद भी अच्छी आती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में युवा वर्ग बुजुर्गों की तुलना में ज्यादा तनाव झेल रहा है। वहीं, वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग का विकास करीब 30 साल की उम्र तक चलता रहता है। ऐसे में इस समय सकारात्मक अनुभव और मानसिक शांति बेहद जरूरी है।
अगर मौका मिले तो पानी के पास कुछ समय जरूर बिताएं। और अगर यह संभव न हो, तो लहरों की आवाज सुनना भी फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि कई बार सबसे बड़ी थेरेपी, सिर्फ एक लहर ही होती
ब्लू माइंड थेरेपी के फायदे
1. मानसिक शांति और तनाव में कमी
जब हम पानी समुद्र, झील या नदी को देखते हैं, तो हमारा मस्तिष्क “हाइपर-अलर्ट” मोड से हटकर एक आरामदायक स्थिति में चला जाता है। इसे “सॉफ्ट फॅसिनेशन” कहते हैं, जो मानसिक थकान को दूर करता है और कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है।
2. रचनात्मकता
लगातार स्क्रीन और शोर-शराबे के बीच रहने से हमारी सोचने की क्षमता ब्लॉक हो जाती है। पानी के पास जाने से मस्तिष्क को ‘डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क’ में जाने का मौका मिलता है, जिससे नए विचार और क्रिएटिविटी बढ़ती है।
3. बेहतर नींद और शारीरिक स्वास्थ्य
पानी की आवाज़ जैसे लहरों का टकराना एक प्रकार का ‘व्हाइट नॉइज़’ पैदा करती है, जो दिमाग को शांत कर गहरी नींद लाने में मदद करती है। इसके अलावा, पानी के पास की हवा में नकारात्मक आयन होते हैं जो ऑक्सीजन सोखने की क्षमता बढ़ाते हैं और मूड को बेहतर करते हैं।
4. माइंडफुलनेस
पानी की गति और उसकी ध्वनि हमें वर्तमान क्षण में रहने में मदद करती है। यह बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के ध्यान (Meditation) की स्थिति में ले जाने का एक नेचुरल तरीका है।
(डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। दिन का भास्कर किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
















