महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे को लेकर Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि हादसे के पीछे पायलट की कोई लापरवाही सामने नहीं आई है, लेकिन एयरपोर्ट से जुड़ी कई कमियां जरूर सामने आई हैं।
जांच के मुताबिक हादसे से पहले तक पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच बातचीत सामान्य तरीके से चल रही थी। कंट्रोल रूम ने पायलट को बताया था कि उस समय विजिबिलिटी करीब 3 किलोमीटर है। इसके बावजूद विमान ने लैंडिंग के लिए एप्रोच जारी रखी, लेकिन बाद में गो-अराउंड किया गया। दूसरी बार एप्रोच के दौरान पायलट ने रनवे दिखाई देने की जानकारी दी, जिसके बाद टॉवर ने रनवे 11 पर लैंडिंग की अनुमति दे दी और यह भी बताया कि हवा शांत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लैंडिंग की अनुमति मिलने के कुछ ही समय बाद कॉकपिट से अचानक “ओह शिट… ओह शिट…” जैसी आवाज सुनाई दी। इसके तुरंत बाद विमान रनवे 11 के थ्रेशोल्ड के पास, रनवे के बाईं ओर क्रैश हो गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि विमान के दोनों फ्लाइट रिकॉर्डर पीछे के हिस्से से बरामद किए गए हैं। ये रिकॉर्डर काफी देर तक आग की चपेट में रहे, जिसके कारण उनके डेटा को निकालना आसान नहीं है। फिलहाल दिल्ली की एक लैब में एक रिकॉर्डर का रॉ डेटा डाउनलोड किया जा चुका है और उससे हादसे की असली वजह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
प्रारंभिक रिपोर्ट में दोनों पायलटों के ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट का भी जिक्र किया गया है, जिसमें दोनों की रिपोर्ट सामान्य और संतोषजनक पाई गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि हादसे में पायलट की कोई भूमिका संदिग्ध नहीं है।
रिपोर्ट में बारामती एयरपोर्ट की स्थिति और वहां मौजूद सुविधाओं को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं, जिनमें कुछ तकनीकी और संचालन से जुड़ी कमियों का जिक्र किया गया है। इसके अलावा हादसे वाले दिन के मौसम की जानकारी को भी जांच में शामिल किया गया है।
फिलहाल जांच जारी है और फ्लाइट रिकॉर्डर से मिलने वाले डेटा के आधार पर हादसे की पूरी वजह का खुलासा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
















