इंडियन नेवी का बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास MILAN 2026 हाल ही में विशाखापत्तनम के पास समुद्र में आयोजित किया गया था। इस अभ्यास का 13वां संस्करण 21 फरवरी से 25 फरवरी के बीच हुआ। इंडियन नेवी के अनुसार इस बार 74 देशों ने इसमें हिस्सा लिया, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे समावेशी समुद्री अभ्यास बन गया। खास बात यह रही कि जर्मनी, फिलीपींस और यूएई ने पहली बार अपने सैन्य संसाधनों के साथ इसमें भाग लिया।
इंडियन नेवी के मुताबिक इस अभ्यास में दुनिया भर की करीब 42 युद्धपोत (वारशिप) और 29 सैन्य विमान शामिल हुए। इनमें 18 विदेशी युद्धपोत भी थे। इन्हीं में से एक ईरान का युद्धपोत IRIS Dena भी था।
अभ्यास खत्म होने के बाद IRIS Dena विशाखापत्तनम से वापस ईरान लौट रहा था। लेकिन रास्ते में श्रीलंका के पास हिंद महासागर में एक बड़ा हादसा हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अमेरिकी नेवी की पनडुब्बी (सबमरीन) ने इस जहाज पर टॉरपीडो से हमला कर दिया। हमला होने के कुछ ही मिनटों में यह युद्धपोत समुद्र में डूब गया।
बताया जा रहा है कि जहाज पर करीब 180 सैनिक सवार थे। इस हमले में कई सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कुछ लोगों को श्रीलंका की नेवी ने समुद्र से बचाकर बाहर निकाला। अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबोया गया है, जिससे यह घटना काफी अहम और ऐतिहासिक मानी जा रही है।
इस हमले के बाद ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी चेतावनी दी है। साथ ही ईरान ने यह भी बताया कि IRIS Dena हाल ही में भारत में आयोजित MILAN अभ्यास में हिस्सा लेकर लौटा था।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार किसी भी युद्धपोत की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसी देश की नेवी की होती है, जिसका वह जहाज होता है। जब कोई जहाज किसी दूसरे देश के बंदरगाह पर आता है तो मेजबान देश की जिम्मेदारी सिर्फ अपनी समुद्री सीमा यानी टेरिटोरियल वाटर्स तक ही होती है। जैसे ही जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र यानी हाई सीज़ में पहुंचता है, उसकी सुरक्षा पूरी तरह उसके अपने देश की नेवी की जिम्मेदारी होती है।
ऐसे में यह घटना भारत की समुद्री सीमा के बाहर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई है। इसलिए इसे भारत की जिम्मेदारी से जोड़ना अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक सही नहीं माना जा रहा है।
फिलहाल इस घटना को मध्य पूर्व में चल रहे अमेरिका और ईरान के तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना उस बड़े संघर्ष का समुद्र तक फैलता हुआ असर हो सकती है, जो पहले से दोनों देशों के बीच जारी है।
















