अमेरिका-ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बने तनावपूर्ण हालात के कारण खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। इसका असर भारत से फल और सब्जियों के निर्यात पर भी साफ दिखाई दे रहा है। केला, अंगूर, प्याज और तरबूज जैसे उत्पादों से भरे कई रीफर (शीतगृह) कंटेनर बंदरगाहों पर फंस गए हैं। इससे निर्यातकों और किसानों को भारी नुकसान का खतरा पैदा हो गया है।
इस स्थिति को देखते हुए Jawaharlal Nehru Port Authority ने तुरंत राहत के कदम उठाए हैं। महाराष्ट्र के मंत्री Jaykumar Rawal ने बताया कि बंदरगाह पर फंसे निर्यात कंटेनरों के लिए विशेष छूट देने का फैसला किया गया है।
राहत के मुख्य कदम
- ग्राउंड रेंट, स्टोरेज और ड्वेल टाइम चार्ज पर 100% छूट
- रीफर कंटेनरों के प्लग-इन/बिजली कनेक्शन शुल्क में 80% छूट
- प्रभावित कंटेनरों के लिए बंदरगाह पर अतिरिक्त स्टोरेज और स्टैकिंग स्पेस उपलब्ध कराया जाएगा।
कब तक मिलेगी राहत
यह छूट 28 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि से 14 मार्च 2026 की मध्यरात्रि तक, यानी कुल 15 दिनों के लिए लागू रहेगी।
किन कंटेनरों को मिलेगा फायदा
- 28 फरवरी 2026 से टर्मिनल में मौजूद कंटेनर
- 8 मार्च 2026 सुबह 7 बजे तक गेट-इन हुए कंटेनर
मौजूदा स्थिति
बताया जा रहा है कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर करीब 250 से 1000 तक फल-सब्जियों से भरे कंटेनर फंसे हुए हैं। वहीं Mundra Port पर भी लगभग 150 कंटेनर अटके हुए हैं। कुल मिलाकर देशभर में करीब 1000 कंटेनर इस संकट से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
इस बीच प्रमुख शिपिंग कंपनियां जैसे Maersk, MSC और CMA CGM ने मिडिल ईस्ट के कुछ रूट्स पर अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं। इसके कारण Strait of Hormuz और Suez Canal के रास्ते होने वाला समुद्री व्यापार भी प्रभावित हुआ है।
किसानों और निर्यातकों के लिए राहत
बंदरगाह प्राधिकरण का यह फैसला किसानों, निर्यातकों और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। क्योंकि फंसे हुए रीफर कंटेनरों में रखा नाशवान माल खराब होने का खतरा था। प्राधिकरण ने टर्मिनल ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि इन छूटों को तुरंत लागू किया जाए और प्रभावित कार्गो को प्राथमिकता दी जाए।















