देश के मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष अगले एक-दो दिनों के भीतर उनके खिलाफ यह प्रस्ताव पेश कर सकता है।
बताया जा रहा है कि इंडिया गठबंधन के करीब 120 लोकसभा सांसद और 60 राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष इस प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में लाने की योजना बना रहा है। सूत्रों के मुताबिक 12 या 13 मार्च को विपक्षी सांसद यह प्रस्ताव जमा कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव के मसौदे में मुख्य चुनाव आयुक्त पर गलत आचरण, पक्षपातपूर्ण रवैया और भेदभावपूर्ण व्यवहार जैसे आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और बड़ी संख्या में लोगों को मतदान से वंचित किए जाने का मुद्दा भी प्रस्ताव के आधार के रूप में शामिल किया गया है।
इन आरोपों के आधार पर विपक्ष Election Commission of India के प्रमुख के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा हैं।
महाभियोग में क्या आरोप लगाए गए हैं
- वोटर्स को उनके वोटिंग अधिकार से वंचित करने का आरोप है।
- टीएमसी के नेताओं के साथ जब उनका डेलीगेशन चुनाव आयोग मिलने गया था, उसके साथ दुर्व्यवहार का आरोप।
- संवैधानिक संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इंडिया टीवी से बातचीत में कहा कि हम संविधान का बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उसके लिए जो भी जरूरत पड़ेगी करेंगे। बता दें कि सीईसी को संविधान की आर्टिकल 324(5) के तहत हटाया जा सकता है, जिसमें जजो को हटाने वाले प्रावधान जैसे प्रावधान ही सीईसी को हटाने के लिए भी होते है। अगर विपक्ष ये प्रस्ताव लाता है तो देश के इतिहास में पहली बार होगा।
इससे पहले 1993 में संसद की दहलीज पर खड़े होकर उस समय सिर्फ एक वकील की हैसियत से कपिल सिब्बल ने पहले महाभियोग में जस्टिस वी रामास्वामी के समर्थन में उनके वकील के तौर पर पैरवी की थी। 6 घंटे उन्होंने बहस किया था। इसके बाद उनके बतौर वकील की परफॉर्मेंस से कांग्रेस नेता इतने इंप्रेस हुए कि उन्हें पार्टी ज्वाइन करवाकर टिकट दिया। यह मोशन डिफीट हुआ था।
















