रसोई गैस की लगातार बढ़ती मांग और आपूर्ति में असंतुलन को देखते हुए सरकार ने गैस सिलेंडर की बुकिंग को लेकर नया नियम लागू किया है। इस फैसले के बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सिलेंडर बुकिंग और डिलीवरी की प्रक्रिया में बदलाव होगा। नए नियम के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग 45 दिन बाद ही की जा सकेगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अवधि कम से कम 25 दिन होगी। इस फैसले का असर विशेष रूप से उज्ज्वला योजना से जुड़े परिवारों पर पड़ सकता है।
सिलेंडर उपलब्ध कराना बन सकता है चुनौती
जानकारी के अनुसार बस्तर जिले में उज्ज्वला योजना के करीब 1 लाख 32 हजार परिवार हैं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र से हैं। पहले से ही कई ग्रामीण परिवार उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर भरवाने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाते थे, लेकिन अब नए नियम के बाद उन्हें करीब डेढ़ महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण परिवारों के लिए थोड़ी परेशानी जरूर बढ़ा सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे रसोई गैस वितरण व्यवस्था को संतुलित करने में मदद मिलेगी। उज्ज्वला योजना के तहत कई गरीब परिवारों को सब्सिडी पर गैस सिलेंडर मिलता है, लेकिन अब इस नियम के बाद समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य रसोई गैस वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाना और आपूर्ति में होने वाली दिक्कतों को कम करना है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
गैस डिपो पर प्रबंधन किया जाएगा मजबूत
जिला खाद्य नियंत्रक अधिकारी जी. एस. राठौर ने बताया कि बुकिंग और डिलीवरी व्यवस्था में बदलाव के साथ ही गैस डिपो पर प्रबंधन को भी मजबूत किया जाएगा। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। साथ ही उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे बुकिंग प्रक्रिया का पालन करें और गैस लेने के लिए डिपो पर भीड़ न लगाएं।
जलाऊ लकड़ी पर बढ़ सकती है निर्भरता
ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की कमी होने पर लोग फिर से जलाऊ लकड़ी पर अधिक निर्भर हो सकते हैं, जिससे घरेलू ईंधन की समस्या और पर्यावरण पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं की गैस डिपो पर मौजूदगी भी पहले से बढ़ गई है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से रसोई गैस की मांग और आपूर्ति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और गैस की कमी से होने वाली समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
















