भारतीयों का सोने के प्रति लगाव किसी से छिपा नहीं है। हर निवेशक चाहता है कि उसके पोर्टफोलियो में सोने की चमक बनी रहे। लेकिन अक्सर सोने की ऊंची कीमतें और कमोडिटी मार्केट के बड़े लॉट साइज आम निवेशकों के लिए मुश्किल खड़ी कर देते हैं। अगर आप भी कम बजट में सोने में निवेश करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए काम की है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अब रिटेल निवेशकों के लिए नया विकल्प लेकर आ रहा है। बाजार नियामक SEBI से मंजूरी मिलने के बाद NSE 16 मार्च 2026 से कमोडिटी डेरिवेटिव सेगमेंट में 10 ग्राम गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च करेगा। माना जा रहा है कि इससे छोटे निवेशकों के लिए सोने में ट्रेडिंग करना काफी आसान हो जाएगा।
GOLD10G नाम से होगा ट्रेड
एनएसई के आधिकारिक सर्कुलर के मुताबिक, इस नए कॉन्ट्रैक्ट को ट्रेडिंग स्क्रीन पर GOLD10G सिंबल के नाम से पहचाना जाएगा। अब तक कमोडिटी ट्रेडिंग को बड़े निवेशकों का क्षेत्र माना जाता था, क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट का साइज बड़ा होता था।
लेकिन इस नए कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग और डिलीवरी साइज सिर्फ 10 ग्राम तय किया गया है। यानी अब निवेशकों को गोल्ड फ्यूचर्स में ट्रेडिंग के लिए बड़ी रकम लगाने की जरूरत नहीं होगी। इसमें सोने की कीमत 10 ग्राम के आधार पर कोट की जाएगी। साथ ही न्यूनतम प्राइस मूवमेंट (टिक साइज) 1 रुपये प्रति 10 ग्राम रखा गया है, जिससे छोटे बदलावों पर भी ट्रेडिंग की जा सकेगी।
ट्रेडिंग का समय
इस गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग सोमवार से शुक्रवार तक होगी। ट्रेडिंग हर दिन सुबह 9 बजे से शुरू होकर रात 11:30 या 11:55 बजे तक चलेगी। समय सीमा अमेरिका के डेलाइट सेविंग पीरियड के अनुसार थोड़ा बदल सकती है।
बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव से निवेशकों को बचाने के लिए एक्सचेंज ने सर्किट लिमिट भी तय की है। शुरुआत में 6% की प्राइस लिमिट लागू होगी। अगर बाजार में ज्यादा हलचल होती है और यह सीमा पार हो जाती है, तो ट्रेडिंग 15 मिनट के लिए रोक दी जाएगी। इसके बाद लिमिट बढ़ाकर अधिकतम 9% कर दी जाएगी।
यह कॉन्ट्रैक्ट मंथली एक्सपायरी वाला होगा, यानी हर महीने के आखिरी कारोबारी दिन इसकी ट्रेडिंग समाप्त हो जाएगी।
डिलीवरी के सख्त नियम
इस कॉन्ट्रैक्ट में अनिवार्य फिजिकल डिलीवरी का प्रावधान रखा गया है। यानी एक्सपायरी के समय सौदे के अनुसार निवेशक को सोना लेना या देना होगा।
डिलीवरी के लिए 999 शुद्धता (24 कैरेट) वाला 10 ग्राम सोना ही स्वीकार किया जाएगा। यह सोना केवल LBMA से अनुमोदित या NSE द्वारा स्वीकृत सप्लायर का होना चाहिए और इसके साथ क्वालिटी सर्टिफिकेट भी जरूरी होगा।
सोने की डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया एनएसई के नामित क्लियरिंग हाउस के माध्यम से अहमदाबाद में पूरी की जाएगी।
(Disclaimer:ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. दिन का भास्कर अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझावदेता है।)
















