देश में नक्सलवाद खत्म करने की केंद्र सरकार की समयसीमा अब करीब आ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य तय कर चुके हैं। इस दिशा में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति का असर अब जमीन पर दिखने लगा है।
एक तरफ जहां नक्सल प्रभावित इलाकों में मुठभेड़ों में नक्सली ढेर हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसे नक्सल विरोधी अभियान में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
गढ़चिरोली में माओवादियों को बड़ा झटका
महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले से बड़ी खबर सामने आई है। यहां 17 माओवादियों ने पुलिस और CRPF के सामने सरेंडर कर दिया। इनमें डीवीसीएम, एरिया कमेटी सचिव, पीपीसीएम, कमांडर और एसीएम रैंक के 11 बड़े कैडर शामिल हैं, जबकि 6 अन्य सदस्य भी इनके साथ शामिल हैं।
इन सभी पर महाराष्ट्र सरकार ने कुल 68 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह आत्मसमर्पण संगठन की कमजोर होती पकड़ और बदलते हालात का संकेत है।
2026 तक नक्सलमुक्त भारत का लक्ष्य
केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नक्सलवाद खत्म करने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। सरकार का दावा है कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
पिछले एक साल में छत्तीसगढ़ में अभियान के तहत 287 नक्सली मारे गए, 1000 को गिरफ्तार किया गया और 837 नक्सलियों ने सरेंडर किया है।
लगातार हो रहे आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की सख्ती से नक्सल प्रभावित इलाकों में सरकार की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्ती और पुनर्वास की नीति से आने वाले समय में नक्सलवाद पर और प्रभावी नियंत्रण संभव है।
















