वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार, 20 मार्च को रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले ₹93 के करीब पहुंच गया। यह गिरावट देश की अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव का संकेत मानी जा रही है। खासकर Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ा है।
रुपया पहुंचा नए निचले स्तर पर
शुक्रवार सुबह इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 92.92 पर खुला और कुछ ही समय में गिरकर 93.08 तक पहुंच गया। इससे पहले 18 मार्च को यह 92.63 के स्तर तक गया था, लेकिन अब नई गिरावट ने रिकॉर्ड बना दिया है।
तेल की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
मध्य पूर्व में हमलों और तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। Brent Crude गुरुवार को करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, हालांकि शुक्रवार को यह थोड़ा गिरकर 107 डॉलर के आसपास रहा। भारत की आयात पर निर्भरता के कारण इसका सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की निकासी जारी
मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम निकाल ली है। सिर्फ गुरुवार को ही करीब ₹7500 करोड़ की बिकवाली हुई। इससे रुपये पर दबाव और बढ़ गया है।
शेयर बाजार में थोड़ी राहत
रुपये की कमजोरी के बीच शेयर बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली। BSE Sensex करीब 960 अंक चढ़कर 75,000 के पार पहुंच गया, वहीं Nifty 50 भी 300 अंकों से ज्यादा उछला।
आगे क्या रह सकता है रुख?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर रुपया 93 के ऊपर बना रहता है तो यह 93.20 से 93.40 तक जा सकता है। वहीं 92.70 का स्तर एक अहम सपोर्ट माना जा रहा है।
आम लोगों पर असर
रुपये की कमजोरी का असर महंगाई पर साफ दिख सकता है। पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य आयातित चीजें महंगी हो सकती हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा।
















