आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती मांग अब टेक्नोलॉजी बाजार पर साफ असर डाल रही है। सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने के कारण कई कंपनियों ने जहां स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ाई हैं, वहीं अब पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड भी महंगे हो गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में इनकी कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है और कई मामलों में दाम लगभग दोगुने हो गए हैं।

IDC की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल मेमोरी शॉर्टेज की वजह से यह स्थिति बनी है। यह कमी 2026 से 2027 की दूसरी छमाही तक जारी रह सकती है। AI डेटा सेंटर में DRAM की बढ़ती मांग ने सप्लाई चेन को असंतुलित कर दिया है।
क्यों बढ़ रही है मेमोरी की कमी?
रिपोर्ट के अनुसार, AI इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार के चलते DRAM और NAND मेमोरी की मांग बढ़ गई है। यही मेमोरी स्मार्टफोन, पीसी और छोटे स्टोरेज डिवाइस जैसे पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड में भी इस्तेमाल होती है। AI कंपनियां इन चिप्स के लिए ज्यादा कीमत देने को तैयार हैं, जिससे सप्लाई का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर की ओर जा रहा है।
बड़ी कंपनियों का बढ़ा दबाव
माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा और अमेजन जैसी कंपनियां AI चिप्स के लिए बड़े स्तर पर मेमोरी खरीद रही हैं। इसका असर सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, SK Hynix और Micron Technology जैसे सप्लायर्स पर भी पड़ा है।
मेमोरी चिप्स की लागत किसी भी डिवाइस की कुल कीमत का करीब 15-20% होती है। ऐसे में चिप की कमी से स्मार्टफोन की कीमतों में 10-15% तक बढ़ोतरी हो रही है।
तेजी से बढ़ रहे दाम
रिपोर्ट के अनुसार, DRAM की कीमत हर महीने करीब 25% तक बढ़ रही है। अक्टूबर से जनवरी के बीच मेमोरी कार्ड की कीमतों में 40% तक उछाल आया, जबकि फरवरी में ही 25% और बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दिल्ली के बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी में 32GB पेन ड्राइव की कीमत 180-200 रुपये थी, जो अब बढ़कर 340-360 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं 64GB पेन ड्राइव 395-415 रुपये से बढ़कर करीब 580 रुपये तक पहुंच गई है।
फोटोग्राफी और वीडियो इंडस्ट्री पर असर
शादी के सीजन में पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड की बढ़ती कीमतों का असर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी इंडस्ट्री पर भी पड़ रहा है। लागत बढ़ने से इन सेवाओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ महीनों तक मेमोरी डिवाइस के दाम ऊंचे बने रह सकते हैं।















