मूडीज एनालिटिक्स की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मध्य पूर्व में जारी संघर्ष लंबा चलता है, तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत को सबसे बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थिति में भारत के आर्थिक उत्पादन में बेसलाइन अनुमान के मुकाबले करीब 4 फीसदी तक गिरावट आ सकती है।
रिपोर्ट में भारत को चीन और दक्षिण कोरिया के साथ उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है, जिन पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी कीमतों का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
तेल-गैस आयात पर निर्भरता बनी जोखिम की वजह
भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा खाड़ी देशों से तेल और गैस आयात पर उसकी ज्यादा निर्भरता है। जैसे-जैसे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है ये असर
इस संकट का असर कई मोर्चों पर दिख सकता है—
- महंगाई बढ़ सकती है
- व्यापार घाटा और ज्यादा बढ़ सकता है
- लोगों की खपत पर असर पड़ सकता है
मूडीज ने साफ कहा है कि खाड़ी देशों से ऊर्जा आयात पर निर्भरता के कारण भारत और चीन को ज्यादा नुकसान झेलना पड़ सकता है।
सीमित भंडार से बढ़ेगी चुनौती
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विकसित देशों की तुलना में भारत के पास ऊर्जा का रणनीतिक भंडार कम है। ऐसे में संकट की स्थिति में दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से सब्सिडी और कीमतों पर नियंत्रण जैसे कदम शुरुआती राहत दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक महंगे ईंधन से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।
एशिया-प्रशांत की ग्रोथ भी होगी धीमी
अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की विकास दर प्रभावित हो सकती है। अनुमान है कि 2025 में 4.3 फीसदी रहने वाली ग्रोथ 2026 में घटकर 4 फीसदी रह सकती है।
फिर भी भारत रहेगा सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था
इन चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है। अनुमान है कि 2025 में 7.8 फीसदी रहने वाली विकास दर 2026 में 7.5 फीसदी और 2027 में करीब 6.5 फीसदी रह सकती है।
महंगाई और रुपये पर दबाव
महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के लक्ष्य के आसपास रह सकती है, लेकिन कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी से यह लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।
वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 60 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई है।















