माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा में हिंदी पेपर लीक होने से न सिर्फ परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं, बल्कि पूरा अकादमिक कैलेंडर भी प्रभावित हो गया है। पहले जहां रिजल्ट मई के पहले सप्ताह तक आने की उम्मीद थी, अब इसमें देरी की संभावना जताई जा रही है।
मंडल ने हिंदी विषय की दोबारा परीक्षा 10 अप्रैल को कराने का फैसला लिया है। इस निर्णय से लाखों छात्र दुविधा में हैं कि वे दोबारा परीक्षा की तैयारी करें या राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं पर ध्यान दें।
अप्रैल और मई में जेईई, नीट, CUET और अन्य परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। 2 से 8 अप्रैल तक जेईई मेन, 3 मई को नीट, 17 मई को जेईई एडवांस और 11 से 31 मई तक CUET होगी। ऐसे में छात्रों के लिए समय प्रबंधन बड़ी चुनौती बन गया है।
हिंदी की दोबारा परीक्षा के कारण अब रिजल्ट मई की बजाय जून में आने की संभावना है। इसका असर खासकर मेडिकल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की तैयारी कर रहे छात्रों पर पड़ेगा।
पेपर लीक मामले में पुलिस रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और रायगढ़ समेत कई जिलों में छात्रों से पूछताछ कर चुकी है। मोबाइल जांच के बाद छात्रों को छोड़ दिया गया है, लेकिन अब तक पेपर वायरल करने वालों तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं दुखद हैं और इससे छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ता है। यह समय प्रतियोगी परीक्षाओं पर ध्यान देने का होता है, लेकिन दोबारा परीक्षा से उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है।
छात्रों को सलाह दी गई है कि वे समय का सही प्रबंधन करें, पढ़ाई के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखें और तनाव से दूर रहें। वहीं अभिभावकों से भी बच्चों का मनोबल बढ़ाने की अपील की गई है।
















