भारत पर आयात शुल्क बढ़ाने की दिशा में मैक्सिको का कदम, 2026 से कई उत्पाद महंगे होने की आशंका: भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार मोर्चे पर एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. मैक्सिको ने एशियाई देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है. वहां की संसद में पारित प्रस्ताव के तहत कई श्रेणियों के उत्पादों पर अलग-अलग दरों से शुल्क बढ़ाने की तैयारी है.यह नई व्यवस्था वर्ष 2026 से लागू होने की उम्मीद है, जिसके बाद भारतीय वस्तुओं पर भी इसकी सीधी मार पड़ सकती है. मैक्सिको का तर्क है कि घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धा से बचाना आवश्यक है, इसलिए आयात शुल्क संरचना को कड़ा किया जा रहा है.व्यपार विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से भारत के निर्यातकों को नई रणनीति बनानी पड़ेगी, क्योंकि रसायन, मशीनरी, ऑटो-पार्ट्स, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी श्रेणियों पर असर संभव है.
2026 में मैक्सिको का बड़ा व्यापारिक फैसला: भारत-चीन समेत एशियाई देशों के आयात पर भारी शुल्क लागू: अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में बड़ी हलचल मचाने वाला कदम उठाते हुए मैक्सिको ने एशिया क्षेत्र से आने वाले हजारों उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने की मंजूरी दे दी है. वहां की संसद ने वह प्रस्ताव पारित कर दिया है जिसके बाद लगभग 1400 वस्तुओं की आयात लागत बढ़ने वाली है.नई व्यवस्था के तहत कई श्रेणियों पर शुल्क दरें लगभग आधी तक पहुंच जाएंगी. यह ढांचा वर्ष 2026 में प्रभाव में आएगा, जिसके बाद भारत, चीन और अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को बड़े स्तर पर प्रभाव महसूस होगा.वाणिज्य विशेषज्ञों के अनुसार, विभिन्न उत्पाद समूहों पर अलग-अलग दरें लागू होंगी. इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, मशीनरी, मेटल उत्पाद, ऑटो पार्ट्स और केमिकल श्रेणियों पर सबसे अधिक दबाव पड़ सकता है.मेक्सिको का तर्क है कि यह कदम स्थानीय उद्योगों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा, जबकि निर्यातक देशों के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी होंगी.
मैक्सिको के नए शुल्क नियमों का एशियाई देशों पर बड़ा प्रभाव : मैक्सिको का नया शुल्क ढांचा एशिया क्षेत्र की कई अर्थव्यवस्थाओं पर भारी असर डालने वाला माना जा रहा है.जिन राष्ट्रों के साथ किसी तरह की व्यापारिक व्यवस्था लागू नहीं है, उन पर असर काफी गहरा होगा. चीन, भारत, साउथ कोरिया, थाइलैंड और इंडोनेशिया पर सबसे अधिक दबाव पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल, स्टील और कई अन्य वस्तुएँ वहीं से आती हैं. संसद में स्वीकृत ढांचा कई उत्पाद समूहों पर लगभग पचास प्रतिशत शुल्क लागू करेगा. जिन पर पुराना शुल्क पहले जारी था, उनमें कुछ श्रेणियों का भार बढ़कर पचास प्रतिशत तक पहुँच जाएगा, जबकि कुछ समूहों का भार थोड़ा कम रहेगा.
मैक्सिको का शुल्क बढ़ाने का कारण सामने आया:
टैरिफ बढ़ाने वाला प्रस्ताव संसद में भारी बहुमत के साथ पारित हुआ, जहाँ समर्थन में 76 मत पड़े और केवल पाँच सदस्यों ने असहमति जताई. चर्चा के दौरान बताया गया कि यह निर्णय स्थानीय उद्योगों को ताकत देने के उद्देश्य से लिया गया है, ठीक उसी दिशा में चलते हुए जिसे अमेरिका अपनाए हुए है. व्यापार जगत ने इस कदम का तीखा विरोध जताया है, वहीं कई आर्थिक विशेषज्ञों और निजी क्षेत्र का मानना है कि यह निर्णय पड़ोसी राष्ट्र को खुश करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है. सत्ता पक्ष का तर्क है कि यह बदलाव राजकोषीय कमी को घटाने में मदद करेगा और लगभग 3.76 अरब डॉलर की अतिरिक्त आमदनी सुनिश्चित कर सकता है.
















