आज के समय में क्रेडिट कार्ड सिर्फ नौकरीपेशा लोगों तक सीमित नहीं रह गया है। भारत में बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज तेजी से बदल रही हैं। अब छात्र, गृहिणियां, फ्रीलांसर और छोटे कारोबारी भी बिना सैलरी स्लिप या पक्के इनकम प्रूफ के क्रेडिट कार्ड हासिल कर सकते हैं, बस सही विकल्प चुनने की जरूरत है।
FD के आधार पर क्रेडिट कार्ड
अगर आपके पास नियमित इनकम का कोई दस्तावेज नहीं है, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बदले क्रेडिट कार्ड लेना सबसे सुरक्षित और आसान तरीका माना जाता है। HDFC, ICICI, SBI और IDFC First जैसे बैंक FD के आधार पर सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड जारी करते हैं। इसमें आमतौर पर 10,000 या 15,000 रुपये की FD करानी होती है, जिसके बदले बैंक FD राशि का करीब 75 से 90 प्रतिशत तक क्रेडिट लिमिट दे देता है। समय पर भुगतान करने से आपका क्रेडिट स्कोर भी धीरे-धीरे बनना शुरू हो जाता है।
परिवार के कार्ड पर ऐड-ऑन कार्ड
अगर आपके परिवार में किसी के पास पहले से क्रेडिट कार्ड है, तो आप उनके कार्ड पर ऐड-ऑन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें आपकी अलग से इनकम प्रूफ की जरूरत नहीं होती। पति-पत्नी, माता-पिता या बच्चे इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। हालांकि, ऐड-ऑन कार्ड से किए गए खर्च की जिम्मेदारी मुख्य कार्डधारक की होती है।
छात्रों के लिए खास क्रेडिट कार्ड
अब कई बैंक और फाइनेंशियल संस्थान कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड ऑफर कर रहे हैं। इन कार्ड्स के लिए सैलरी स्लिप जरूरी नहीं होती। इनकी क्रेडिट लिमिट सीमित होती है, लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग, ट्रैवल बुकिंग और इमरजेंसी खर्चों में ये काफी उपयोगी साबित होते हैं। साथ ही, कम उम्र में ही फाइनेंशियल डिसिप्लिन सीखने में मदद मिलती है।
बैंक स्टेटमेंट के आधार पर मौका
अगर आपके पास सैलरी स्लिप नहीं है, लेकिन किराया, फ्रीलांस काम या किसी अन्य स्रोत से नियमित आमदनी होती है, तो बैंक स्टेटमेंट के आधार पर भी क्रेडिट कार्ड मिलने की संभावना रहती है। कुछ बैंक पिछले 6 महीनों के लेन-देन को देखकर ग्राहक की भुगतान क्षमता का आकलन करते हैं।
गारंटर का सहारा
जिन लोगों की अपनी इनकम फाइल मजबूत नहीं है, वे गारंटर या को-साइनर के जरिए भी क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर गारंटर की आय स्थिर है और उसका क्रेडिट रिकॉर्ड अच्छा है, तो बैंक आवेदन स्वीकार कर सकता है।
बिना इनकम प्रूफ के क्रेडिट कार्ड मिल जाना अच्छी बात है, लेकिन उसका समझदारी से इस्तेमाल करना ज्यादा जरूरी है। समय पर बिल भुगतान, लिमिट के भीतर खर्च और अनावश्यक EMI से दूरी आपकी वित्तीय सेहत को मजबूत बनाए रखती है।
















