ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं। सैयद अली हुसैनी खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामी सरकार के खिलाफ बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। बढ़ती महंगाई, कमजोर होती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा बलों की कथित दमनकारी कार्रवाई को लेकर जनता में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
8 जनवरी की रात हालात और तनावपूर्ण हो गए, जिसके बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली सरकार ने एहतियातन देशभर में इंटरनेट सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल बंद करने का फैसला किया।
इस बीच, आज़ादी के नारों के साथ जारी प्रदर्शनों को देखते हुए देश की न्यायपालिका और सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। अब तक इन प्रदर्शनों में 42 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
पहलवी ने किया विरोध प्रदर्शन का आह्वान

युवराज रजा पहलवी ने गुरुवार और शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी। रजा पहलवी के पिता 1979 की इस्लामी क्रांति से ठीक पहले गंभीर बीमारी की हालत में ईरान छोड़कर देश से बाहर चले गए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही रात 8 बजे, तेहरान के अलग-अलग इलाकों में सरकार विरोधी नारे गूंजने लगे। कई जगहों पर प्रदर्शनकारी रजा पहलवी के आह्वान का पालन करते हुए सड़कों पर उतरते नजर आए।
प्रदर्शनों के दौरान ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ और ‘इस्लामी गणराज्य मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए गए। भीड़ में मौजूद लोगों ने यह भी कहा कि, “यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी वापस लौटेगा।”
42 लोगों की मौत, हजारों हिरासत में
ईरान के लगभग सभी बड़े शहरों और ग्रामीण कस्बों में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन गुरुवार को भी जारी रहे। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कई इलाकों में बाजार और दुकानें बंद रहीं।
अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,270 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
















