सड़कों पर बिना बीमा वाले वाहन और लापरवाह ड्राइविंग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ऐसे वाहनों को जब्त करने का अधिकार देने और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नियमों को सख्त करने के प्रस्ताव तैयार किए हैं। इसके अलावा, ड्राइवर के व्यवहार को बीमा प्रीमियम से जोड़ने की भी योजना बनाई जा रही है।
मंत्रालय ने इस हफ्ते राज्यों के परिवहन मंत्रियों और आयुक्तों के साथ बैठक में अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा साझा किया। इसके तहत प्रवर्तन एजेंसियों को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वे बिना बीमा चल रहे वाहनों को हिरासत में ले सकें। साथ ही यह भी प्रस्ताव है कि जिन लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस पिछले तीन साल में रद्द हुआ है, उन्हें नया लाइसेंस जारी न किया जाए।
कैसे तय होगा बीमा प्रीमियम?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 147 में संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि बीमा नियामक IRDAI को वाहन की उम्र और चालान इतिहास के आधार पर बीमा प्रीमियम और देनदारी तय करने का अधिकार मिल सके। इसका मकसद यह है कि बीमा की कीमत ड्राइवर के व्यवहार से जुड़ी हो और बार-बार नियम तोड़ने वालों को ज्यादा प्रीमियम देना पड़े।
एक अधिकारी ने कहा कि चालान का रिकॉर्ड यह बताने के लिए काफी होता है कि वाहन कैसे चलाया जा रहा है। फिलहाल थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के लिए आधार प्रीमियम और देनदारी सरकार तय करती है, वह भी IRDAI से सलाह लेकर। बावजूद इसके, खासकर दोपहिया वाहनों में बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की है जिनके पास वैध बीमा नहीं है।
ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नियमों में बदलाव
ड्राइवर के व्यवहार को लाइसेंस प्रणाली से जोड़ने के लिए मंत्रालय ने मोटर वाहन कानून की धारा 9 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। यह धारा ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण से जुड़ी है। प्रस्ताव के अनुसार, जिन लोगों के चालान रिकॉर्ड में असुरक्षित ड्राइविंग दिखाई देती है, उन्हें ड्राइविंग टेस्ट से छूट नहीं मिलेगी। अभी का नियम यह है कि लाइसेंस की वैधता खत्म होने से एक साल पहले नवीनीकरण कराने पर ड्राइविंग टेस्ट जरूरी नहीं होता।
इस प्रस्ताव पर विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। दिल्ली के पूर्व उप परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा का कहना है कि 15 साल के लाइसेंस अवधि में चालान होना आम बात है। उनका कहना है कि हर नवीनीकरण पर ड्राइविंग टेस्ट जरूरी होना चाहिए, लेकिन जिनका लाइसेंस रद्द हुआ है, उन पर नया लाइसेंस देने की पूरी रोक नहीं लगनी चाहिए, खासकर जब जांच में उनकी गलती न पाई जाए।
इसके अलावा, मंत्रालय ने बड़े और भारी वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस लेने की शर्तों में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अनुभव और कौशल के आधार पर बड़े वाहनों के लाइसेंस दिए जाएंगे, ताकि सड़क पर सुरक्षा बेहतर हो सके।
बीमा दायरा और मेडिकल नियमों में बदलाव
सरकार थर्ड पार्टी बीमा के दायरे को भी बढ़ाने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव है कि निजी वाहनों में भी मालिक, ड्राइवर और वाहन में बैठे व्यक्ति को बीमा सुरक्षा मिले। अभी यह व्यवस्था केवल व्यावसायिक वाहनों के लिए लागू है।
इसके अलावा, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने की उम्र सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। फिलहाल 40 साल की उम्र के बाद मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी होता है, जिसे बढ़ाकर 60 साल करने की योजना है।
















