दिल्ली के तुर्कमान गेट क्षेत्र में फैज-ए-इलाही मस्जिद के समीप अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई पत्थरबाजी और हिंसा के मामले में तीस हजारी कोर्ट ने बुधवार को पांचों आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट सायशा चड्ढा ने आदेश सुनाते हुए कहा कि लगातार पत्थर फेंके जाना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचना सीधे तौर पर प्रशासन पर हमला है। अदालत ने आरोपों की गंभीरता और मामले की जांच की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इनकार किया।
अदालत ने दिल्ली पुलिस के इस तर्क को भी रिकॉर्ड पर लिया कि जांच अभी शुरुआती दौर में है। इसके बाद आरोपित आरिब, काशिफ, कैफ, अदनान और समीर की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड में लिया कि सिपाही संदीप द्वारा सही पहचान किए जाने के बाद सभी आरोपितों के नाम प्राथमिकी में दर्ज किए गए थे। साथ ही, आरोपित आरिब का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी प्राप्त किया गया है, जिससे घटना स्थल पर उसकी मौजूदगी की पुष्टि होती
आरोपितों की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किलों की गिरफ्तारी जल्दबाजी में की गई और यह कार्रवाई प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही कर ली गई थी। वकील ने यह भी कहा कि आरोपितों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे आपस में एक-दूसरे को जानते तक नहीं हैं।
हालांकि, अदालत ने इन सभी तर्कों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए पुलिस जांच को प्राथमिकता दी। पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक 20 से अधिक आरोपितों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
















