बजट 2026 से पहले इनकम टैक्स से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसका सीधा असर आम करदाताओं से लेकर सैलरी पाने वाले वर्ग पर पड़ेगा। इस बार सरकार इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में संशोधन नहीं करेगी, बल्कि नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में जरूरी बदलाव करने की तैयारी में है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पुराना कानून इतने सालों से लागू है, तो अचानक उसे बदलने की जरूरत क्यों पड़ी और इसका प्रभाव किन-किन लोगों पर देखने को मिलेगा?
असल में, 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स एक्ट, 1961 को पूरी तरह समाप्त किया जाना तय है। उसकी जगह नया और ज्यादा सरल माने जा रहे इनकम टैक्स एक्ट, 2025 को लागू किया जाएगा। इस नए कानून को अगस्त 2025 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन फिलहाल इसे लागू नहीं किया गया है। ऐसे में बजट 2026 के जरिए सरकार ऐसे कानून में बदलाव नहीं कर सकती, जो जल्द ही खत्म होने वाला है। इसी कारण टैक्स से जुड़े सभी अहम संशोधन सीधे नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में किए जाएंगे।
1961 से 2025: सेक्शन की जगह शेड्यूल सिस्टम
नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में सबसे बड़ा बदलाव स्ट्रक्चर का है। अब तक टैक्स छूट और डिडक्शन अलग-अलग सेक्शन में मिलते थे- जैसे 80C, 80D, HRA, LTA (LTA under Income Tax Act 2025) वगैरह। लेकिन 2025 एक्ट में इन सबको शेड्यूल सिस्टम में शिफ्ट किया गया है।
उदाहरण के तौर पर, टैक्स सेविंग निवेश और NPS, मेडिक्लेम जैसी कटौतियां अब शेड्यूल XV (NPS and mediclaim schedule XV) में दी गई हैं, जिन्हें अलग-अलग सेक्शन के जरिए लागू किया जाएगा। इसका मकसद है कानून को आसान बनाना (Income tax simplification India) और भविष्य में बदलाव आसान करना।
HRA, LTA और अलाउंस का नया ढांचा
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) जैसी छूटें पहले की तरह मिलेंगी, लेकिन इनके नियम अब शेड्यूल III में दर्ज होंगे। यानी कॉन्सेप्ट वही रहेगा, लेकिन नियमों को सेक्शन से हटाकर शेड्यूल और रूल्स के जरिए लागू किया जाएगा। ऑफिशियल ड्यूटी और पर्सनल खर्च से जुड़े स्पेशल अलाउंस भी इसी शेड्यूल सिस्टम के तहत आएंगे। इससे सरकार को जरूरत पड़ने पर नियम बदलने की ज्यादा आजादी मिलेगी।
होम लोन ब्याज और नया टैक्स रिजीम
खुद के मकान पर होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली राहत को नए कानून में और साफ शब्दों में परिभाषित किया गया है। यानी डिडक्शन रहेगा, लेकिन शर्तें ज्यादा स्पष्ट होंगी। वहीं नया टैक्स रिजीम, जो अभी सेक्शन 115BAC के तहत है, 2025 एक्ट में नए सेक्शन के साथ जारी रहेगा। इसकी बनावट लगभग वही रहेगी, लेकिन इसे नए कानून के अनुरूप ढाला जाएगा।
रिबेट की व्यवस्था भी बदल गई?
नए कानून के तहत रिबेट की व्यवस्था भी बदली गई है। नए टैक्स रिजीम में ₹12 लाख तक और पुराने रिजीम में ₹5 लाख तक की आय पर रिबेट का प्रावधान रखा गया है। इससे मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा मिलेगा।
बजट 2026 का असली मैसेज
बजट 2026 यह साफ कर देगा कि सरकार टैक्स सिस्टम को लंबे समय के लिए सरल, स्थिर और कम विवाद वाला बनाना चाहती है। 1961 के कानून में पाबंदी लगाने की बजाय 2025 के नए ढांचे में बदलाव करना इसी रणनीति का हिस्सा है।
टैक्सपेयर्स के लिए साफ संकेत है कि नाम बदला है, ढांचा बदला है। लेकिन ज्यादातर छूट और फायदे फिलहाल बने रहेंगे। फर्क बस इतना है कि अब इनकम टैक्स का खेल नए नियमों और नए शेड्यूल के साथ खेला जाएगा।
















