धनबाद के गलफरबाड़ी स्थित सन्यासी मंदिर के पास जंगल इलाके में चल रही अवैध कुआंनुमा तीन कोयला खदानें मंगलवार देर रात अचानक धंस गईं। हादसे में कई मजदूरों के दबने और कुछ के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
हादसे के समय कई मजदूर खदान के अंदर काम कर रहे थे। खदान धंसते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, खदान संचालकों ने कुछ स्थानीय कोयला चोरों की मदद से रातों-रात खदान में दबे और फंसे मजदूरों को बाहर निकाला। जिन मजदूरों की मौत हो चुकी थी, उनके शवों को भी चोरी-छिपे निकालकर ठिकाने लगा दिया गया।
सबूत मिटाने के लिए खदान भरवाई गई
घटना के बाद खदान संचालकों ने डोजर और जेसीबी मशीनों से दुर्घटनाग्रस्त खदानों को भरवा दिया, ताकि जिला प्रशासन को मौके पर कोई सबूत न मिल सके। बताया जा रहा है कि मृतक मजदूर पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे, जिस कारण डर के चलते उनके परिजन अब तक सामने नहीं आए हैं। खदान संचालकों ने केस दर्ज होने का डर दिखाकर और कुछ आर्थिक मदद देकर परिजनों को चुप करा दिया।
भट्ठा संचालकों पर अवैध खनन कराने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुधियापानी के कुख्यात कोयला चोर और भट्ठा संचालक मुन्ना और पिंटू स्थानीय युवकों को पैसे देकर जंगल में अवैध कोयला खदानें चलवाते हैं। इन खदानों से निकला कोयला ट्रैक्टर, पिकअप वैन और बाइक के जरिए उनके भट्ठों तक पहुंचाया जाता है, जहां से ट्रकों में लोड कर बंगाल, बिहार और यूपी की मंडियों में भेजा जाता है।
हादसे के बावजूद खुलेआम अवैध कारोबार
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी मुन्ना और पिंटू के भट्ठों में दिनदहाड़े अवैध कोयले की ढुलाई जारी रही। इससे कोयला माफियाओं के बढ़ते हौसले साफ दिखाई देते हैं।
पुलिस को नहीं दी गई सूचना
बुधवार को मैथन में आयोजित पुलिस सम्मान समारोह में धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, लेकिन गलफरबाड़ी में हुई इस घटना की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। आरोप है कि गलफरबाड़ी ओपी पुलिस ने पूरे मामले को दबा दिया। वहीं ओपी प्रभारी दीपक कुमार दास ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है।
















