UGC एक्ट से जुड़े नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में कुल 12 याचिकाएं दायर की गई थीं। गुरुवार को इन याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2026 को अधिसूचित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम के अमल पर रोक लगाई है। याचिकाकर्ताओं ने इन नियमों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और बहिष्करणकारी बताते हुए कहा कि ये न सिर्फ संविधान, बल्कि UGC अधिनियम 1956 का भी उल्लंघन करते हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वह जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि कानून यह नहीं मान सकता कि भेदभाव केवल किसी एक खास वर्ग के खिलाफ ही होगा। जैन ने कहा कि धारा 3C के तहत दी गई परिभाषा संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है, क्योंकि भेदभाव की परिभाषा पहले से मौजूद है और उसे किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं किया जा सकता।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि दक्षिण भारत का कोई छात्र उत्तर भारत में पढ़ने आता है या उत्तर का छात्र दक्षिण में जाता है और उसके खिलाफ कोई व्यंग्यात्मक या अपमानजनक टिप्पणी की जाती है, जबकि दोनों की जाति पता न हो, तो ऐसी स्थिति में यह किस प्रावधान के तहत आएगा। इस पर वकील जैन ने जवाब दिया कि ऐसी स्थिति धारा 3E के अंतर्गत कवर होती है।
















