अब तक YouTube पर भाषा कई यूजर्स के लिए एक बड़ी रुकावट थी। कई बार लोग ऐसे क्रिएटर्स का कंटेंट पूरा समझ नहीं पाते थे, जो किसी दूसरी भाषा में वीडियो बनाते थे। लेकिन YouTube के ऑटो-डबिंग फीचर ने इस समस्या को काफी हद तक दूर कर दिया है।
YouTube ने बताया है कि अब ऑटो-डबिंग फीचर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध है और इसे 27 भाषाओं में सपोर्ट दिया गया है। इससे यूजर्स अपनी पसंद की भाषा में वीडियो देख और सुन सकते हैं।

तेजी से बढ़ रहा है ऑटो-डबिंग का इस्तेमाल
प्लेटफॉर्म के मुताबिक, दिसंबर 2025 में करीब 60 लाख डेली व्यूअर्स ने कम से कम 10 मिनट का ऑटो-डब किया हुआ कंटेंट देखा। यह आंकड़ा दिखाता है कि यूजर्स इस फीचर को तेजी से अपना रहे हैं।
किन भाषाओं में मिल रही है डबिंग सुविधा?
YouTube पर अब अरबी, बंगाली, चीनी, पारंपरिक चीनी, डच, फ्रेंच, जर्मन, हिब्रू, हिंदी, इंडोनेशियाई, इतालवी, जापानी, कोरियाई, मलयालम, पोलिश, पुर्तगाली, पंजाबी, रोमानियाई, रूसी, स्पेनिश, स्वाहिली, तमिल, तेलुगु, थाई, तुर्की, यूक्रेनी, उर्दू और वियतनामी जैसी भाषाओं से अंग्रेजी में डबिंग की सुविधा मिल रही है।
वहीं, अंग्रेजी से अरबी, बंगाली, डच, फ्रेंच, जर्मन, हिब्रू, हिंदी, इंडोनेशियाई, इतालवी, जापानी, कोरियाई, मलयालम, पोलिश, पुर्तगाली, पंजाबी, रूसी, स्पेनिश, तमिल, तेलुगु और यूक्रेनी भाषाओं में डबिंग सपोर्ट की जा रही है।

ओरिजिनल भावनाओं के साथ एक्सप्रेसिव स्पीच
YouTube ने कुछ चुनिंदा भाषाओं में एक्सप्रेसिव स्पीच फीचर भी लॉन्च किया है। यह सुविधा फिलहाल अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, हिंदी, इंडोनेशियाई, इतालवी, पुर्तगाली और स्पेनिश भाषाओं में उपलब्ध है।
कंपनी का कहना है कि यह फीचर ओरिजिनल वीडियो की आवाज, भावनाओं और बोलने के अंदाज को बेहतर तरीके से कैप्चर करता है, जिससे डब किया गया कंटेंट ज्यादा नैचुरल लगता है।
क्या है प्रिफर्ड लैंग्वेज सेटिंग?
YouTube ने यूजर्स को अपनी पसंद की भाषा चुनने का विकल्प भी दिया है। अब यूजर यह तय कर सकते हैं कि वे वीडियो को ओरिजिनल भाषा में देखना चाहते हैं या डब किए गए ऑडियो में।
अगर कोई भाषा आपकी पसंदीदा लिस्ट में है, तो उस भाषा के वीडियो डिफॉल्ट रूप से ओरिजिनल ऑडियो में ही चलेंगे और उन्हें ट्रांसलेट नहीं किया जाएगा।
लिप-सिंक फीचर पर भी काम
YouTube ने माना है कि डबिंग के दौरान कई बार लिप-सिंक सही नहीं बैठता। इस समस्या को हल करने के लिए कंपनी एक नए लिप-सिंक पायलट फीचर का परीक्षण कर रही है, जिससे वीडियो देखने का अनुभव और ज्यादा नैचुरल हो सके।
क्रिएटर्स का भी रखा गया है ध्यान
YouTube ने साफ किया है कि ऑटो-डबिंग का असर वीडियो के डिस्कवरी एल्गोरिदम पर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, स्मार्ट टेक्नोलॉजी यह भी पहचान लेती है कि किन वीडियो को डब नहीं किया जाना चाहिए, जैसे म्यूजिक वीडियो या साइलेंट व्लॉग।
कंपनी का कहना है कि ऑटो-डबिंग से कंटेंट की दूसरी भाषाओं में पहुंच और बेहतर होगी।
















