नेता विपक्ष राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने का मौका न मिलने के मुद्दे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस मामले को बड़ा राजनीतिक विवाद बताते हुए सभी विपक्षी दल मिलकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इसकी तैयारी के तहत विपक्षी दलों ने सोमवार से अपने सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को सदन में बोलने से रोका गया। इसके अलावा बजट सत्र के दौरान विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया और कुछ महिला सांसदों पर की गई टिप्पणियों को लेकर भी स्पीकर ओम बिरला के फैसलों को पक्षपातपूर्ण बताया जा रहा है। इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस तैयार कर रहा है।
हालांकि, इस बीच विपक्ष ने बातचीत का रास्ता भी खुला रखा है। सोमवार को राहुल गांधी के साथ अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी और टीआर बालू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और इस टकराव को टालने के लिए चर्चा की।
विपक्षी दल चर्चा के लिए तैयार
विपक्षी सूत्रों के अनुसार इस दौरान राहुल गांधी ने स्पीकर से कहा कि विपक्षी दल चर्चा के लिए तैयार हैं बशर्ते जनरल नरवणे की पुस्तक समेत उन्हें अपनी बातें रखने का मौका दिया जाए, कांग्रेस के आठ सांसदों का निलंबन खत्म हो तथा पार्टी की महिला सांसदों पर लगाए हमले के आरोपों को वापस लिया जाए। स्पीकर ने सरकार से बात करने के बाद विपक्षी नेताओं को इस बारे में अवगत कराने की बात कही।
राहुल गांधी ने स्पीकर से मुलाकात की
स्पीकर से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने भी पत्रकारों से कहा कि चार मुद्दों पर बोलने की अनुमति मांगी है जिसके बाद बजट पर चर्चा शुरू हो, स्पीकर ने इस पर सरकार से बात कर अपडेट देने को कहा है। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेता बिरला के अंतिम फैसले और मंगलवार को सदन में सरकार का रूख देखने के बाद अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को आगे बढ़ाने पर अगला कदम उठाएंगे।
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला सोमवार सुबह राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संसद स्थित कार्यालय कक्ष में विपक्षी आइएनडीआइए के घटक दलों के नेताओं की बैठक में हुआ। इसमें तमाम विपक्षी दलों के साथ तृणमूल कांग्रेस, सपा और वामदल भी शामिल थे।
विपक्ष ने स्पीकर पर लगाए पक्षपात के आरोप
सूत्रों के अनुसार बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस विपक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत देगा जिस पर 100 से अधिक विपक्षी सांसदों ने सोमवार को ही हस्ताक्षर कर दिए।
स्पीकर पर लगातार पक्षपात का आरोप लगा रहे विपक्ष के अब आक्रामक तेवरों का संकेत कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह कहते हुए दिया कि नेता विपक्ष छाया प्रधानमंत्री होता है मगर स्पीकर उन्हें बोलने नहीं देते जबकि सत्तापक्ष जब चाहे, कुछ भी सदन में बोलता है। इसके खिलाफ कार्रवाई के लिए हमारे पास भी विकल्प हैं जिन पर हम विचार कर रहे।
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने तो सीधे तौर पर स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की बात कही। वैसे विपक्ष यह प्रस्ताव लाता भी है तो सत्तापक्ष के पास सदन में बहुमत के आंकड़े को देखते हुए बिरला की कुर्सी के लिए कोई खतरा नहीं है मगर आसन की छवि और निष्पक्षता पर विवाद की सियासी विवाद की छाया जरूर पड़ेगी।
अब तक चार बार लाया जा चुका है अविश्वास प्रस्ताव
लोकसभा में पहले भी चार बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है मगर एक बार भी यह पारित नहीं हो पाया है। सबसे पहली बार अविश्वास प्रस्ताव जीवी मावलंकर के खिलाफ आया। हुकुम सिंह के खिलाफ आया अविश्वास प्रस्ताव पर्याप्त संख्या बल के कारण पेश नहीं हो सका। जबकि तीसरी बार अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष ने तत्कालीन स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ पेश किया मगर यह पारित नहीं पाया।
















