भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना में बदलाव को लेकर मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य योजना के दायरे को बढ़ाना, प्रक्रिया को आसान बनाना और कृषि क्षेत्र की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे अधिक प्रभावी बनाना है।
आरबीआई ने जारी ड्राफ्ट गाइडलाइंस पर बैंकों, वित्तीय संस्थानों, आम नागरिकों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक हितधारक 6 मार्च तक अपने सुझाव और आपत्तियां भेज सकते हैं। माना जा रहा है कि इन बदलावों के बाद किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ ज्यादा किसानों तक पहुंच सकेगा और उन्हें कर्ज लेने में सहूलियत मिलेगी।
RBI ने दिए क्या-क्या प्रस्ताव?
आरबीआई ने लोन मंजूरी और पुनर्भुगतान शेड्यूल में समानता लाने के लिए फसल के मौसम को अवधि के हिसाब से मानकीकरण करने का प्रस्ताव दिया है। कम अवधि वाली फसलों के लिए 12 महीने का वक्त तय किया गया है जबकि लंबी अवधि में तैयार होने वाली फसलों के लिए अवधि 18 महीने तय की गई है।
केंद्रीय बैंक ने केसीसी (KCC) के ड्राइंग सीमा को हर फसल के मौसम के लिए फाइनेंस के स्केल के साथ जोड़ने का भी प्रस्ताव दिया है ताकि यह पक्का हो सके कि किसानों को खेती की असली लागत के आधार पर सही क्रेडिट मिले।
इसके अलावा, मिट्टी की टेस्टिंग, रियल टाइम मौसम का अनुमान और आर्गेनिक खेती के बेहतर तरीकों के इस्तेमाल में होने वाले खर्च को भी अवयव के तौर पर शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। ये खर्च, खेती की चीजों की मरम्मत और रखरखाव के लिए अभी मंजूर 20 प्रतिशत अतिरिक्त अवयव में शामिल होंगे।
फरवरी में मौद्रिक नीति का एलान करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने इस बारे में एलान किया था, जिसके बाद यह मसौदा गाइडलाइन जारी की गई हैं।
















