शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत दुर्ग जिले में इस साल कक्षा पहली में प्रवेश के लिए कुल 1,364 सीटें तय की गई हैं। इस प्रक्रिया में 513 निजी स्कूल शामिल हैं, लेकिन इनमें से 228 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी सीट उपलब्ध नहीं है। सीटों की संख्या में इस बार करीब 65 प्रतिशत की भारी कमी आई है।
पहले जिले के 524 स्कूलों में कुल 4,267 सीटें थीं, लेकिन अब नर्सरी और केजी स्तर पर प्रवेश बंद कर सीधे पहली कक्षा में एडमिशन देने की व्यवस्था लागू होने से सीटें घटकर 1,364 रह गई हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार, सीटों का निर्धारण यू-डायस पोर्टल में दर्ज छात्रों की संख्या के आधार पर किया गया है। पहले छोटे कक्षाओं में प्रवेश होता था, लेकिन अब सीधे पहली कक्षा में एडमिशन होने से कई स्कूलों में पहले से पढ़ रहे छात्रों के प्रमोशन के कारण सीटें पहले ही भर चुकी हैं।
228 स्कूलों में नहीं मिलेगा एडमिशन का मौका
जिले के 228 स्कूलों में पहली कक्षा के लिए एक भी सीट खाली नहीं है। वहीं 224 स्कूल ऐसे हैं जहां सिर्फ 1 से 5 सीटें ही उपलब्ध हैं। ऐसे में इस बार अभिभावकों के लिए एडमिशन पाना पहले के मुकाबले ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे समय सीमा के भीतर आवेदन करें और सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से तैयार रखें, ताकि चयन प्रक्रिया में कोई परेशानी न हो।
प्रथम चरण
पंजीयन 16 फरवरी-31 मार्च
सत्यापन समानांतर
लॉटरी 13-17 अप्रैल
प्रवेश 1-30 मई
द्वितीय चरण
पंजीयन 1-11 जुलाई
सत्यापन साथ-साथ
लॉटरी 27-31 जुलाई
प्रवेश 3-17 अगस्त
इनमें रहेगी मारामारी
करीब 26 स्कूल ऐसे हैं जहां 10 या अधिक सीटें हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा तीव्र होने की संभावना है। प्रमुख स्कूलों में
केपीएस पुलगांव 11 सीटें
केपीएस नेहरू नगर 34 सीटें
डीपीएम दुर्ग 35 सीटें
शारदा विद्यालय 20 सीटें
शकुंतला विद्यालय 18 सीटें
डीएवी हडको 31 सीटें
डीपीएम रिसाली 1 सीट
डीएवी नंदिनी 5 सीटें
















