छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के अबूझ और दुर्गम ओएंगर इलाके में सुरक्षा बलों ने बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाकर नक्सलियों के छिपाए गए विस्फोटक और हथियारों का जखीरा बरामद किया है। इस कार्रवाई से एक संभावित बड़े हमले को टाल दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, 12 फरवरी को 29वीं बटालियन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने ओएंगर के घने जंगल और पहाड़ी इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। यह इलाका लंबे समय से नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों के रूप में जाना जाता रहा है।
दुर्गम इलाके में चला सर्च ऑपरेशन
सुरक्षा एजेंसियों को पिछले कुछ समय से ओएंगर क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। इसके बाद संयुक्त टीम ने इलाके में सर्च और एरिया डोमिनेशन अभियान तेज किया।
घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते और हर कदम पर आईईडी का खतरा—इन चुनौतियों के बीच जवानों ने घंटों पैदल मार्च कर अभियान को अंजाम दिया। इसी दौरान जंगल में छिपाकर रखे गए विस्फोटक और हथियारों का जखीरा बरामद हुआ।
आईईडी बनाने की सामग्री मिली
बरामद सामग्री में प्राइमा कॉर्ड, सेफ्टी फ्यूज, इलेक्ट्रिक वायर, आईईडी मैकेनिज्म और देशी हथियार शामिल हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन सामग्रियों से एक से अधिक आईईडी तैयार किए जा सकते थे, जिनका इस्तेमाल सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता था।
हमला टला, लेकिन खतरा बरकरार
इस कार्रवाई से एक बड़ी घटना टल गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब नक्सली संगठन बड़े हमलों की बजाय छोटे-छोटे हमले और स्लीपर सेल के जरिए वारदातों की रणनीति अपना रहे हैं।
फिलहाल सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन और गश्त बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि नक्सल गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए अभियान जारी रहेगा।















