छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। एक्साइज विभाग के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर नवीन कुमार तोमर को करीब 27 लाख रुपये के कथित लेन-देन मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन्हें इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें 28 फरवरी तक EOW की कस्टडी में भेज दिया।
जांच में तेजी, नेटवर्क खंगालने में जुटी एजेंसी
रिमांड के दौरान जांच एजेंसी तोमर से पूरे नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ करेगी। इससे पहले एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने उनके एक करीबी को हिरासत में लेकर शुरुआती जांच की थी। बाद में यह मामला आगे की कार्रवाई के लिए EOW को सौंप दिया गया।
EOW का कहना है कि मौजूदा सबूतों के आधार पर ही गिरफ्तारी की गई है। अब एजेंसी पूरे फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और कथित सिंडिकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
3200 करोड़ रुपये से ज्यादा का कथित घोटाला
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एसीबी में दर्ज एफआईआर के आधार पर करीब 3200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का जिक्र किया है। आरोप है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक सिंडिकेट के जरिए पूरे सिस्टम को प्रभावित कर अवैध कमाई की गई।
जांच में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के पूर्व एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के नाम सामने आए हैं। एजेंसियों का दावा है कि इस घोटाले को तीन हिस्सों—A, B और C—में अंजाम दिया गया।
कैसे हुआ घोटाला? तीन हिस्सों में समझिए
A: डिस्टलरी से कमीशन वसूली
जांच के मुताबिक डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपये तक कमीशन लिया गया। बाद में इसकी भरपाई के लिए शराब की कीमतें बढ़ाने और ओवर बिलिंग की छूट दी गई।
B: नकली होलोग्राम से बिक्री
आरोप है कि अतिरिक्त शराब बनाकर उस पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बेची गई। सप्लाई, बोतल और वितरण के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय थीं। एजेंसियों को 40 लाख से ज्यादा पेटी शराब की बिक्री के सबूत मिले हैं।
C: सप्लाई जोन में गड़बड़ी
देशी शराब दुकानों को जोन में बांटकर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप है। EOW के अनुसार, तीन साल में सप्लाई के नाम पर करीब 52 करोड़ रुपये ‘पार्ट C’ के जरिए सिंडिकेट तक पहुंचाए गए।
जांच में अहम कड़ी माने जा रहे तोमर
नवीन कुमार तोमर की गिरफ्तारी को इस बड़े घोटाले की जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब पूरे फाइनेंशियल नेटवर्क और जुड़े लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही हैं। आने वाले समय में इस मामले में और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
















