लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन एडल्ट्स (LADA) को आमतौर पर टाइप 1.5 डायबिटीज कहा जाता है। इस बीमारी के बारे में जागरूकता कम होने के कारण कई लोग इसे टाइप 1 डायबिटीज समझ लेते हैं। यही वजह है कि सही पहचान न होने से इलाज में देरी होती है और मरीज के लिए जोखिम बढ़ जाता है। इस खबर में हम आपको इसी खास तरह की डायबिटीज के बारे में बता रहे हैं।
टाइप 1 और टाइप 2 दोनों जैसे दिखते हैं लक्षण
टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण टाइप 1 और टाइप 2 दोनों से मिलते-जुलते होते हैं। यह टाइप 1 की तरह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, लेकिन यह आमतौर पर वयस्कों में होती है और टाइप 2 की तरह धीरे-धीरे विकसित होती है। यही कारण है कि अक्सर लोग इसे टाइप 2 डायबिटीज समझ बैठते हैं, जिससे सही समय पर पहचान और इलाज नहीं हो
तुरंत नहीं चाहिए इंसुलिन
चूंकि, टाइप 1.5 डायबिटीज धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए इसमें तुरंत ही इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती है। ज्यादातर को पांच साल के अंदर इंसुलिन लेना पड़ता है, वहीं टाइप 1 में ज्यादातर शुरुआत से ही इंसुलिन देने की जरूरत पड़ती है। 30 साल से अधिक उम्र के लोगों में टाइप 1.5 डायबिटीज के मामले ज्यादा देखे जाते हैं, जोकि टाइप 1 होने की उम्र से काफी ज्यादा है लेकिन टाइप 2 से काफी कम।
ये होते हैं कारण
- शोधकर्ताओं का मानना है कि टाइप 1.5 डायबिटीज तब होता है जब पैनक्रियाज में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर एंटीबॉडीज गलती से हमला करना शुरू कर देते हैं।
- इंसुलिन की गैरमौजूदगी में ग्लूकोज खून में जमा होने लगता है, जैसा कि टाइप 1 डायबिटीज में होता है।
ये होते हैं लक्षण
- ज्यादा प्यास लगना
- अचानक वजन कम हो जाना
- अत्यधिक थकान महसूस होना
- बार-बार पेशाब लगना
- भूख बढ़ जाना
- आंखों में धुंधलापन
- घाव ठीक होने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगना
- स्किन पर खुजली या ड्राइनेस होना
ये हैं इलाज के ऑप्शन
- टाइप 1.5 डायबिटीज आमतौर पर ओरल दवाओं की मदद से मैनेज किया जाता है।
- यह बीमारी के नियंत्रण और दवाओं के इस्तेमाल पर निर्भर करता है। टाइप 1.5 डायबिटीज में दिन में कई बार दवाएं लेने की जरूरत होती है।
- कुछ डॉक्टर तुरंत ही इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं और कुछ डॉक्टर तब तक इसे लेने की सलाह नहीं देते हैं जब तक कि जरूरी नहीं हैं।
(Disclaimer: लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो, तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।)
















