राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 के सोशल साइंस सिलेबस में बदलाव किया है। नए सिलेबस में “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” अध्याय के तहत अब न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक नया खंड शामिल किया गया है। इस संबंध में परिषद ने आधिकारिक सूचना भी जारी कर दी है।
न्यायपालिका की चुनौतियों पर फोकस
नए अध्याय में न्यायिक व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि न्यायपालिका के अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या है। साथ ही मामलों के भारी लंबित बोझ को भी चुनौती के रूप में शामिल किया गया है, जिसके पीछे न्यायाधीशों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाएं और कमजोर बुनियादी ढांचा जैसे कारण बताए गए हैं।
पहले सिलेबस में नहीं था भ्रष्टाचार का जिक्र
पुरानी पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका की भूमिका, उसकी स्वतंत्रता, अदालतों की संरचना और न्याय तक पहुंच जैसे विषय शामिल थे, लेकिन भ्रष्टाचार का सीधा उल्लेख नहीं था। हालांकि, उसमें यह जरूर बताया गया था कि मामलों के निपटारे में लंबा समय लगना आम लोगों की न्याय तक पहुंच को प्रभावित करता है। इसी संदर्भ में “न्याय में देरी, न्याय से वंचित होना” (Justice delayed is justice denied) वाक्य का जिक्र किया गया था।
शिकायतें और कार्रवाई की प्रक्रिया का भी उल्लेख
नई सामग्री में यह भी बताया गया है कि 2017 से 2021 के बीच इस तंत्र के तहत 1,600 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। साथ ही, गंभीर मामलों में न्यायाधीशों को हटाने के संवैधानिक प्रावधान की भी जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि संसद महाभियोग प्रस्ताव पास करके न्यायाधीश को हटा सकती है, लेकिन इससे पहले उचित जांच और न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है।
गरीब और वंचितों पर ज्यादा असर
पुस्तक में यह भी माना गया है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का असर आम लोगों पर पड़ता है, खासकर गरीब और वंचित वर्ग के लिए न्याय तक पहुंच और कठिन हो जाती है। इस बदलाव के जरिए छात्रों को न्याय व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों से भी अवगत कराने की कोशिश की गई है।
















