आठवें वेतन आयोग में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय इस बार फिटमेंट फैक्टर है। कर्मचारियों और पेंशनर्स का सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा। कुछ संगठनों का अनुमान है कि यह 2 से 3.6 के बीच हो सकता है।
NC-JCM (स्टाफ साइड) के नेता और ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने स्पष्ट किया कि अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। उनका कहना है कि फिटमेंट फैक्टर एक संवेदनशील मुद्दा है और इस पर अलग-अलग संगठनों की अलग राय है। इसलिए कोई संख्या अभी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
सरकार के सामने एक ‘कॉमन मेमोरेंडम’ रखा जाएगा और अंतिम सहमति के बाद ही प्रस्ताव आएगा। इस बार सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं, बल्कि पूरे वेतन ढांचे में बदलाव की तैयारी की जा रही है। खासतौर पर उस ‘बास्केट’ में बदलाव की बात हो रही है, जिस पर महंगाई, मिनिमम वेज और फिटमेंट तय होता है।
स्टाफ साइड का कहना है कि आज के दौर में घर का खर्च बदल चुका है। अब दाल-चावल ही नहीं, बल्कि खान-पान, रहन-सहन, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर खर्च भी बढ़ गया है। अगर इन बदलावों को वेतन गणना में शामिल नहीं किया गया तो कर्मचारियों को वास्तविक राहत नहीं मिलेगी।
AIRF के जनरल सेक्रेटरी का संदेश साफ है कि फिटमेंट फैक्टर पर सस्पेंस जारी है, लेकिन इस बार वेतन आयोग में बड़े ढांचागत बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।















