पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की रफ्तार को धीमा कर दिया। नतीजा यह रहा कि प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 में तेज गिरावट देखी गई। अब निवेशकों की निगाह इस बात पर टिकी है कि नया सप्ताह राहत लेकर आएगा या बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
बीते सप्ताह दर्ज हुई तेज गिरावट
पिछले हफ्ते बाजार में भारी दबाव रहा। वैश्विक स्तर पर तनाव और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के चलते निवेशक जोखिम लेने से कतराते नजर आए। बीएसई सेंसेक्स लगभग 4,355 अंक गिरकर 74,564 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 1,299 अंक लुढ़ककर 23,151 के स्तर पर पहुंच गया। यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ा रहा चिंता
बाजार में कमजोरी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव रहा। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के संकेत से वैश्विक बाजारों में असुरक्षा बढ़ गई। यह जलमार्ग दुनिया की तेल और गैस सप्लाई के लिए अहम है। किसी भी तरह की बाधा से कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ सकती है।
रुपये की कमजोरी और विदेशी बिकवाली
इस दौरान भारतीय रुपये में कमजोरी देखी गई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगातार बाजार से पैसा निकाला। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने विदेशी निवेशकों को सतर्क किया। इसके चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
इस हफ्ते बाजार की संभावित चाल
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी। खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतें बाजार के मूड को प्रभावित करेंगी। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो कंपनियों की लागत और महंगाई पर असर पड़ सकता है।
















