पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान I-PAC दफ्तर में मौजूद रहने पर Supreme Court of India ने कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की स्थिति ठीक नहीं है और इसे एक असामान्य घटना बताया। साथ ही सवाल उठाया कि क्या ऐसी परिस्थिति में केंद्रीय एजेंसी को बिना किसी सुरक्षा या उपाय के छोड़ दिया जाना चाहिए।
दरअसल, ED ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एजेंसी का आरोप है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री की दखलअंदाजी हुई। ED ने इसे सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताया है। यह कार्रवाई चुनावी रणनीति से जुड़ी कंपनी I-PAC और उसके प्रमुख Prateek Jain से जुड़ी है, जहां से लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए।अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या क्या कहा
- SC ने ED रेड के दौरान ममता बनर्जी के जबरदस्ती घुसने पर टिप्पणी की।
- कोर्ट ने कहा-जो हुआ, वह सुखद स्थिति नहीं है, यह असामान्य है।
- आज सुनवाई के अंत में ममता बैनर्जी के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ED, CBI को FIR दर्ज करने के लिए कैसे कह सकती है?
- बिना किसी पूर्व सबूत के ED इसमें कैसे दखल दे रही है?
- आज SC ने ED रेड के दौरान ममता बनर्जी के जबरदस्ती घुसने पर टिप्पणी की।
- कोर्ट ने कहा-जो हुआ, वह सुखद स्थिति नहीं है, यह असामान्य है।
ईडी ने लगाये हैं ये आरोप
ईडी ने आरोप लगाया है कि, आठ जनवरी को जब टीम प्रतीक जैन के आवास और I-PAC कार्यालय में तलाशी के लिए पहुंची, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वहां पहुंच गई थीं और फाइल, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर लिया। एजेंसी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के काफिले के साथ राज्य पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे और उन्होंने जांच में बाधा डाली थी। ईडी ने कहा, इन घटनाओं के वीडियो सबूत हैं, जिन्हें अदालत में पेश किया जा सकता है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की कार्रवाई को ‘राजनीतिक बदले की भावना’ से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया था कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों को निशाना बनाया जा रहा है।
















