राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब बाजारों में साफ दिखने लगा है। कई जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने से ड्राई फ्रूट्स और औषधीय जड़ी-बूटियों के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। खासकर खजूर, बादाम, अंजीर और पाइन नट जैसी चीजों की कमी से व्यापारी परेशान हैं।
पुरानी दिल्ली का खारी बावली बाजार, जो एशिया का सबसे बड़ा थोक मसाला और ड्राई फ्रूट्स मार्केट माना जाता है, वहां भी सप्लाई लगभग ठप हो गई है। खारी बावली मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव भाटिया के अनुसार, काजू को छोड़कर ज्यादातर ड्राई फ्रूट्स पश्चिम एशिया से आते हैं, लेकिन फिलहाल उनकी सप्लाई बंद है।
ईद से पहले बढ़ी चिंता
ईद का त्योहार नजदीक होने के कारण खजूर की मांग बढ़ गई है, लेकिन बाजार में स्टॉक सीमित है। व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल वे पुराने स्टॉक पर ही निर्भर हैं। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
व्यापार पर बड़ा असर
चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, अगर यह संकट जारी रहा तो दिल्ली में करीब 5,000 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हो सकता है। ईरान से आने वाले पिस्ता, किशमिश, अंजीर और खजूर जैसी चीजों के दाम 30-40 फीसदी तक बढ़ चुके हैं।
दवाओं के कच्चे माल भी महंगे
सीटीआई के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट दीपक गर्ग ने बताया कि केमिकल, प्लास्टिक और एल्युमिनियम जैसे कच्चे माल की कीमतों में भी तेजी आई है, जिससे फार्मा सेक्टर पर असर पड़ रहा है। पैरासिटामोल के कच्चे माल में करीब 47 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है, जबकि अन्य दवाओं में भी लागत बढ़ी है।
स्ट्रीट फूड कारोबार पर भी संकट
दिल्ली में करीब 50,000 स्ट्रीट फूड विक्रेता हैं, जिनमें से 20-30 प्रतिशत कारोबार बंद होने के खतरे में हैं। सप्लाई संकट और बढ़ती कीमतों का असर खारी बावली, चांदनी चौक, सदर बाजार और कश्मीरी गेट जैसे बड़े बाजारों में भी देखने को मिल रहा है।
कुल मिलाकर, इस संकट ने व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों की जेब पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।
















