छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश किया गया। प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने यह बिल सदन में रखा। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने विधेयक का विरोध करते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष की गैरमौजूदगी में ही यह बिल पास कर दिया गया।
क्या है धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 ?
- प्रस्तावित कानून के तहत बल, लालच, दबाव, गलत जानकारी या धोखे से धर्म परिवर्तन कराना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
- अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट या संबंधित अधिकारी को सूचना देनी होगी।
- प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा।
- विधेयक में प्रलोभन, दबाव, गलत तरीके से समझाना, सामूहिक धर्म परिवर्तन और डिजिटल माध्यम से धर्म परिवर्तन जैसी बातों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
- अपने मूल या पैतृक धर्म में वापस लौटने को धर्म परिवर्तन नहीं माना जाएगा।
- सोशल मीडिया के जरिए धर्म परिवर्तन के लिए लालच या प्रलोभन देना भी अपराध की श्रेणी में आएगा।
- अवैध धर्म परिवर्तन कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
- यदि पीड़ित महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति, जनजाति या पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।
- सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में सजा और सख्त होगी—10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना।
- इस कानून के तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, और मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में की जाएगी।
- यह विधेयक पारित होने के बाद प्रदेश में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों पर सख्त कानूनी नियंत्रण लागू हो जाएगा।
















