महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। खबर है कि सरकार इस सत्र में महिला आरक्षण कानून में संशोधन बिल ला सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ में बदलाव कर महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की शर्त से अलग करना चाहती है। हालांकि इसके लिए अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन जरूरी होगा।
सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ बैठक की। इसमें एनसीपी, सपा, बीजेडी, शिवसेना (उद्धव गुट), वाईएसआर कांग्रेस और एआईएमआईएम के नेता शामिल हुए। कांग्रेस और टीएमसी के साथ बातचीत अभी बाकी है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है, ताकि सभी दलों की राय ली जा सके।
अगले हफ्ते संसद में आ सकता है बिल
सरकार की योजना है कि अगले सप्ताह संसद में संशोधन विधेयक पेश किया जाए। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 2027 से महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है। इन दोनों राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
2023 में पास हुआ था नारी शक्ति वंदन कानून
एनडीए सरकार ने 2023 में संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था। इसके लिए संसद का विशेष सत्र भी बुलाया गया था। लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण बिल को संशोधित कर नया नाम दिया गया था।
2029 से लागू होने का था प्रावधान
इस कानून के अनुसार महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होना था, क्योंकि इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था। कोविड-19 के कारण 2021 की जनगणना नहीं हो पाई थी, इसलिए पुराने आंकड़ों पर आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता था। अब सरकार इस शर्त को हटाकर आरक्षण को जल्द लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
















