हाईकोर्ट में रेप के आरोपी को बरी किए जाने के खिलाफ अपील की अनुमति मांगते हुए एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि किसी बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप की श्रेणी में नहीं आते। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप
मामला बेमेतरा जिले का है, जहां पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसे बहलाया और शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के मुताबिक, दोनों एक एग्रीकल्चरल कॉलेज में मजदूरी करने जाते थे, जहां आरोपी से उसकी जान-पहचान हुई थी।
घटना के समय महिला पहले से थी शादीशुदा
पीड़िता ने बताया कि 25 जुलाई 2022 को आरोपी ने उसे शादी का भरोसा दिलाकर अपने घर ले जाकर संबंध बनाए। उस समय महिला पहले से शादीशुदा और गर्भवती थी। सामाजिक डर की वजह से उसने तुरंत शिकायत नहीं की, लेकिन बाद में पति को जानकारी देने के बाद मामला दर्ज कराया गया।
मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर आरोपी बरी
पुलिस ने केस दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने गवाहों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
कोर्ट ने क्या कहा ?
हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने धमकी देकर या दबाव बनाकर सहमति हासिल की। साथ ही यह भी साबित नहीं हुआ कि पीड़िता को धोखे में रखकर शादी का भ्रम पैदा किया गया था।
सहमति से संबंध को रेप नहीं माना
कोर्ट ने साफ किया कि पीड़िता बालिग और पहले से शादीशुदा थी, और उसके बयान से यह स्पष्ट होता है कि संबंध सहमति से बनाए गए थे। ऐसे में इसे रेप का मामला नहीं माना जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी।















