वोल्वो कार इंडिया ने घोषणा की है कि 1 मई 2026 से उसकी पूरी कार रेंज की कीमतों में अधिकतम 1 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी की जाएगी। कंपनी ने बताया कि यह फैसला वैश्विक सप्लाई-चेन में बाधाओं और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण लिया गया है।
कंपनी के अनुसार, इन परिस्थितियों के चलते उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिससे कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया है। यह बढ़ोतरी वोल्वो के सभी मौजूदा मॉडल्स पर लागू होगी। हालांकि, जो ग्राहक 30 अप्रैल 2026 तक बुकिंग करेंगे, उन्हें पुरानी कीमतों पर ही वाहन मिलेंगे।
*भविष्य में और बढ़ सकती हैं कीमतें*
वोल्वो ने यह भी संकेत दिया है कि अगर वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक हालात ऐसे ही बने रहते हैं, तो आगे भी कीमतों में और बदलाव किए जा सकते हैं। कंपनी का कहना है कि वह अपने वाहनों की प्रीमियम क्वालिटी और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं करेगी।
किन मॉडल्स पर पड़ेगा असर ?
वोल्वो भारत में EX30, EX40, XC60, XC90 और EC40 जैसे मॉडल्स की बिक्री करती है। इनकी मौजूदा एक्स-शोरूम कीमत करीब 41 लाख रुपये से 97.8 लाख रुपये तक है।
अन्य कंपनियों ने भी बढ़ाई कीमतें
इसी तरह, BYD India ने भी अपने सभी मॉडलों की कीमतों में 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो 1 मई 2026 से लागू होगी। वहीं, हुंडई मोटर इंडिया भी अपनी कारों की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने जा रही है।
इन कंपनियों ने बढ़ती कच्चे माल की लागत, सप्लाई चेन की समस्या और रुपये के कमजोर होने को कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह बताया है।
इन खास वजहों से है कीमतों पर दबाव
- इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के प्रमुख कच्चे माल-जैसे लिथियम, निकल और कोबाल्ट की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका सीधा असर निर्माण लागत पर पड़ रहा है, खासकर ईवी सेगमेंट में, जहां उत्पादन पहले से ही महंगा होता है।
- मध्य पूर्व और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। इससे ऑटो पार्ट्स और कच्चे माल की आपूर्ति में देरी हो रही है, साथ ही आयात लागत भी बढ़ गई है।
- भारतीय रुपया यूरो के मुकाबले कमजोर हो रहा है, जिससे यूरोप से आयात होने वाले कंपोनेंट्स और पूरी तरह से बनी गाड़ियों की लागत बढ़ गई है। इसका सबसे ज्यादा असर लग्ज़री और प्रीमियम कार कंपनियों पर पड़ रहा है।
- आने वाले समय में CAFÉ 3 (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिसिएंसी) और BS7 जैसे सख्त उत्सर्जन मानकों को लागू किया जाएगा। इन नियमों का पालन करने के लिए कंपनियों को नई तकनीक और रिसर्च में भारी निवेश करना पड़ेगा।
















