लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण विधेयक पर मतदान हुआ। इससे पहले इस बिल और परिसीमन विधेयक को लेकर सदन में लंबी बहस चली, जिसमें विपक्ष ने लगातार आपत्ति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष से इस बिल का समर्थन करने की अपील भी की। हालांकि, अंत में महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका और सरकार को विपक्ष का समर्थन नहीं मिल पाया।
पक्ष और विपक्ष में कितने वोट?
लोकसभा में शुक्रवार को तीन विधेयकों- ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 पर वोटिंग कराई गई। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े तो वहीं, विपक्ष में 230 वोट पड़े। जबकि इस बिल को पास कराने के लिए सदन में दो तिहाई सांसदों के वोट चाहिए थे। आपको बता दें कि लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
अन्य दो बिल को आगे नहीं बढ़ाया जा सका
सदन में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 के अलावा सरकार ने ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था। हालांकि, संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 के गिरने के बाद इन बिलों को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
विपक्ष ने लगातार विरोध किया
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर जमकर बहस हुई। विपक्ष इन बिलों का लगातार विरोध कर रहा था। शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह ने बिल पर बहस का जवाब देते हुए विपक्ष पर करारा हमला बोला और कहा कि इंडी अलायंस परिसीमन का विरोध नहीं बल्कि मुख्य रूप से महिला आरक्षण बिल का विरोध कर रहा है। अमित शाह के भाषण के बाद लोकसभा में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर वोटिंग हुई। हालांकि, बिल के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला।
















