रायपुर, 7 मई 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ न केवल विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन और संरक्षण की दिशा में भी एक सशक्त मॉडल के रूप में उभर रहा है। बढ़ती विद्युत मांग और बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच राज्य सरकार ने संतुलित ऊर्जा उपयोग और जनभागीदारी को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
हाल के समय में देश और दुनिया के सामने आए दो महत्वपूर्ण संकेत इस दिशा में गंभीर चिंतन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। एक ओर अत्यधिक तापमान के कारण कई भारतीय शहर विश्व के सबसे गर्म शहरों में शामिल हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश में विद्युत की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। स्पष्ट है कि तापमान में वृद्धि के साथ बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ रही है।
छत्तीसगढ़ में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। प्रदेश में इस वर्ष विद्युत की अधिकतम मांग 7100 मेगावॉट के पार पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा जहां विकास और जीवन स्तर में सुधार का प्रतीक है, वहीं ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
ऊर्जा क्षेत्र में सुदृढ़ व्यवस्था
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य ने ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया है। छत्तीसगढ़ आज देश के प्रमुख पावर हब के रूप में जाना जाता है और ‘जीरो पावर कट’ राज्य की पहचान बनाए हुए है।
राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता, केंद्रीय संस्थानों से मिलने वाली बिजली, और आवश्यकता पड़ने पर बाजार से ऊर्जा क्रय करने की व्यवस्था के चलते उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। यह व्यवस्था न केवल आम नागरिकों के जीवन को सुगम बनाती है, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देती है।
विकास के साथ बढ़ती ऊर्जा आवश्यकता
प्रदेश में वर्ष 2001 में विद्युत की अधिकतम मांग जहां 1450 मेगावॉट थी, वहीं आज यह 7100 मेगावॉट से अधिक हो चुकी है। यह वृद्धि राज्य में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र के विस्तार को दर्शाती है।छत्तीसगढ़ की प्रति व्यक्ति विद्युत खपत राष्ट्रीय औसत से अधिक होना इस बात का संकेत है कि बिजली अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि समग्र विकास का आधार बन चुकी है।
जनभागीदारी से ही संभव है ऊर्जा संरक्षण
ऊर्जा संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। बिजली का उत्पादन सीमित संसाधनों और जटिल प्रक्रियाओं पर आधारित होता है, इसलिए इसका समझदारी से उपयोग अत्यंत जरूरी है।
दैनिक जीवन में अपनाए गए छोटे-छोटे उपाय बड़े बदलाव ला सकते हैं ए.सी. का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखना,अनावश्यक रूप से जल रहे बिजली उपकरणों को बंद करना, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करना और कार्यालयों एवं संस्थानों में बिजली की बर्बादी रोकना।ये प्रयास न केवल बिजली की बचत करते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संकल्प से सिद्धि की दिशा में आगे बढ़ता राज्य
यदि छत्तीसगढ़ के लगभग 66 लाख उपभोक्ता मात्र 5 प्रतिशत बिजली बचाने का संकल्प लें, तो राज्य की पीक डिमांड में लगभग 350 मेगावॉट की कमी लाई जा सकती है। यह दर्शाता है कि सामूहिक प्रयास कितने प्रभावी हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। यह प्रयास न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऊर्जा संसाधनों को सुरक्षित रखने में भी सहायक होगा।
विद्युत ऊर्जा आधुनिक जीवन की आधारशिला है, लेकिन इसका विवेकपूर्ण उपयोग ही स्थायी विकास सुनिश्चित कर सकता है। छत्तीसगढ़ ने ऊर्जा उपलब्धता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, अब आवश्यकता है कि ऊर्जा संरक्षण को जन-जन का संकल्प बनाया जाए।















