देश में हवाई यात्रा करने वालों के लिए आने वाले दिनों में महंगाई का एक और झटका लग सकता है. एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में आज से 10 फीसदी की बढ़ोतरी लागू हो गई है. विमानन कंपनियों की लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है, ऐसे में इस बढ़ोतरी का असर टिकट कीमतों पर भी पड़ सकता है. दिल्ली में ATF की कीमत एक झटके में 11,000 रुपये प्रति किलोलीटर बढ़ गई है, जिससे एयरलाइन कंपनियों की चिंता बढ़ गई है. हवाई यात्रा उद्योग के लिए ईंधन सबसे महत्वपूर्ण लागतों में से एक माना जाता है. यही कारण है कि ATF की कीमतों में होने वाला हर बदलाव सीधे एयरलाइंस के परिचालन खर्च को प्रभावित करता है. आज से लागू नई दरों के तहत दिल्ली में एयर टर्बाइन फ्यूल की कीमत 1,04,927 रुपये प्रति किलोलीटर से बढ़कर 1,15,927 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है. यह करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि है, जिसे हाल के महीनों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक माना जा रहा है.
ईंधन महंगा, एयरलाइंस पर बढ़ा दबाव
ATF की कीमतों में आई इस बढ़ोतरी से घरेलू विमानन कंपनियों के खर्च में बड़ा इजाफा होगा. विमानन क्षेत्र में ईंधन लागत कुल परिचालन खर्च का 35 से 40 प्रतिशत तक हिस्सा रखती है. ऐसे में जब ईंधन महंगा होता है तो एयरलाइंस के मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है. कंपनियों को या तो अतिरिक्त लागत खुद वहन करनी पड़ती है या फिर टिकट किराए में बढ़ोतरी के जरिए उसकी भरपाई करनी पड़ती है.
क्या यात्रियों को देना पड़ेगा ज्यादा किराया?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ATF की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो एयरलाइंस किराए में संशोधन कर सकती हैं. हालांकि टिकट कीमतों का निर्धारण केवल ईंधन लागत पर निर्भर नहीं करता, बल्कि मांग, प्रतिस्पर्धा और सीटों की उपलब्धता जैसे कई अन्य कारक भी भूमिका निभाते हैं. फिर भी लगातार बढ़ती लागत एयरलाइंस को किराया बढ़ाने की दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर सकती है.
क्यों अहम है ATF की कीमत?
एयर टर्बाइन फ्यूल किसी भी विमान के संचालन की रीढ़ माना जाता है. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, मुद्रा विनिमय दर और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों का सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ता है. जब ATF महंगा होता है तो विमानन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, जबकि कीमतों में कमी आने पर उन्हें राहत मिलती है. यही वजह है कि एयरलाइंस और निवेशक हर महीने होने वाले ATF मूल्य संशोधन पर करीबी नजर रखते हैं.
विमानन उद्योग के सामने नई चुनौती
हाल के वर्षों में घरेलू विमानन बाजार तेजी से बढ़ा है और यात्रियों की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है. ऐसे समय में ईंधन कीमतों में अचानक बढ़ोतरी एयरलाइंस के लिए नई चुनौती बन सकती है. कई कंपनियां पहले से ही प्रतिस्पर्धी किरायों और बढ़ती परिचालन लागत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में ATF की यह वृद्धि उनके वित्तीय समीकरण को प्रभावित कर सकती है.
आगे क्या रहेगा असर?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में एयरलाइंस की रणनीति और वैश्विक तेल बाजार की दिशा पर सभी की नजर रहेगी. यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो ATF दरों में राहत मिल सकती है. लेकिन यदि कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो विमानन कंपनियों पर लागत का दबाव और बढ़ेगा. फिलहाल इतना तय है कि ATF में 10 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी घरेलू विमानन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गई है, जिसका असर आने वाले समय में यात्रियों और एयरलाइंस दोनों पर दिखाई दे सकता है














