साल 2025 का आखिरी ग्रहण एक खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा जो आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को लगेगा। ग्रहण की शुरुआत 21 सितंबर 2025 की रात्रि 22:59 बजे से होगी और समाप्ति मध्य रात्रि में 03:23 बजे होगी। यह सूर्य ग्रहण न्यूजीलैंड, फिजी, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया में प्रमुखता से दिखाई देगा। ज्योतिष अनुसार ये ग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है। चलिए अब जानते हैं साल का आखिरी सूर्य ग्रहण किन राशियों के लिए भारी रहेगा।
122 साल पहले पितृपक्ष में था सिर्फ एक ग्रहण
नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि साल का दूसरा चन्द्र ग्रहण रविवार 7 सितम्बर को पितृपक्ष के आरंभ की पूर्णिमा पर लगा था और अब 15 दिवस बाद 21 सितम्बर को पितृमोक्ष अमावस्या पर आंशिक सूर्यग्रहण की घटना होगी लेकिन इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा । पितृपक्ष में दो ग्रहण की इस घटना के संबंध मे सोशल मीडिया मे प्रसारित किया जा रहा है कि 122 सालों बाद पितृपक्ष की शुरूआत और अंत ग्रहण की घटना से होने जा रहे हैं , इसके लिये 122 साल पहले सन 1903 में हुए दो ग्रहणों का उदाहरण दिया जा रहा है कि तब ये ग्रहण पितृपक्ष के आंरभ और अंत मे थे। जबकि वास्तविक्ता यह है कि सन 1903 में 21 सितम्बर पितृमोक्ष अमावस्या को तो पूर्ण सूर्यग्रहण था इसके 15 दिन बाद 06 अक्टूबर 1903 को आंशिक चंद्रग्रहण हुआ,लेकिन 06 अक्टूबर को तो शरद पूर्णिमा थी और पितृपक्ष समाप्त हुये 15 दिन बीत चुके थे
कब लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण ? (Surya Grahan Kab Hai)
पंचांग के अनुसार, साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण आश्विन माह की अमावस्या तिथि यानी 21 सितंबर 2025, रविवार को लगेगा। इस दिन सर्व पितृ अमावस्या भी है। इसके साथ ही अगले दिन से शारदीय नवरात्रि आरंभ हो जाएगी।
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किस समय लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण (Surya Grahan Timing 2025)
बता दें कि 21 सितंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण रात में करीब 11 बजे आरंभ होगा, जो देर रात 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
2006 में भी पितृपक्ष में लगे थे सूर्य व चन्द्र
सारिका ने कहा कि पितृपक्ष का आंरभ और समापन पर ग्रहण की घटना कोई दुर्लभ नहीं है इसके पहले इस प्रकार की घटना वर्ष 2006 मे हुई थी जबकि पितृपक्ष के आरंभ में 07 सितंबर 2006 भाद्रपद पूर्णिमा पर आंशिक चंद्रग्रहण था जो कि भारत में दिखा भी था । इसके 15 दिन बाद पितृमोक्ष अमावस्या 22 सितम्बर 2006 को वलयाकार सूर्यग्रहण था जो कि भारत में नहीं दिखा । इसके पहले 1978 में भी यह हो चुका है जबकि पितृपक्ष का आरंभ 16 सितम्बर 1978 को पूर्ण चंद्रग्रहण से होकर 02 अक्टूबर 1978 को आंशिक सूर्यग्रहण के साथ समापन हुआ था। इसके पहले भी अनेक बार यह संयोग आता रहा है ।उन्होंने निवेदन किया कि तथ्यों की बिना पड़ताल करे किसी समाचार को मसालेदार बनाना वैज्ञानिक तथ्यों को ग्रहण लगाने के समान है ।
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या नहीं?
ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।
ग्रहण के अवधि के दौरान घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक दें।
ग्रहण में भूलकर भी देवी-देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए।
ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए।
खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से
बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए।
ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना,
सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।
















