सरकार खाद की बिक्री को ज्यादा आसान और व्यवस्थित बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार डिजिटल फार्मर आईडी का इस्तेमाल कर सकती है। यही वही आईडी है, जिसका उपयोग नए किसान पीएम किसान योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए करते हैं। कुछ राज्यों में पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए किसान फार्मर आईडी को जरूरी भी कर दिया गया है।
सरकार तेजी से किसानों की आईडी बनाने पर काम कर रही है। यह एक यूनिक पहचान पत्र होगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि सरकारी योजनाओं का फायदा सही किसान तक पहुंच रहा है या नहीं।
क्या बढ़ेगा यूरिया सब्सिडी का बोझ?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस योजना को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करेगी। फिलहाल सरकार फर्टिलाइजर सब्सिडी पर काफी ज्यादा खर्च कर रही है, और इसे संतुलित करने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है। बजट में फर्टिलाइजर सब्सिडी पर खर्च का अनुमान करीब ₹1.68 ट्रिलियन है, जो बढ़कर ₹1.91 ट्रिलियन से ज्यादा हो सकता है।
बजट से ज्यादा खर्च होने की बड़ी वजह FY26 में यूरिया की रिकॉर्ड खपत बताई जा रही है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच यूरिया की खपत 31.15 मिलियन टन तक पहुंच चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 4 फीसदी ज्यादा है।
अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने पिछले महीने राज्य सरकारों के साथ हुई बैठक में यह प्रस्ताव रखा था कि कुछ जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के जरिए यूरिया बिक्री को एग्री स्टैक से जोड़ा जाए।
पहले चरण में सात जिलों में यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, जहां पहले से बड़ी संख्या में किसान आईडी बन चुकी हैं। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खाद सिर्फ जमीन के मालिक, खेती करने वाले किसान या उनके अधिकृत व्यक्ति को ही दी जाए।
कैसे बनती है फार्मर आईडी?
किसान ID बनाने के लिए, आम तौर पर अपने राज्य के पोर्टल (जैसे PM-KISAN या Agri Stack) के जरिए ऑनलाइन रजिस्टर करें, eKYC के लिए आधार दें, जमीन सर्वे नंबर सहित खेत की डिटेल्स डालें, डेटा इस्तेमाल के लिए सहमति दें, ई-साइन करें, और अप्रूवल ट्रैक करने के लिए एनरोलमेंट ID पाने के लिए सबमिट करें, वेरिफिकेशन के बाद सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए ID जेनरेट हो जाएगी।

आप CSC पर जाकर भी फार्मर आईडी बनवा सकते हैं। अगर आप खुद से बनाना चाहते हैं तो आप अपने राज्य के पोर्टल या फिर फार्मर रजिस्ट्री ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
इतने किसानों की बन चुकी ID?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 4 दिसंबर, 2025 तक देश में लगभग 7.67 करोड़ किसान ID या किसानों की डिजिटल पहचान बनाई जा चुकी है। ये ID डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत किसानों की डेमोग्राफिक प्रोफाइल, जमीन की जानकारी और खेती के तरीकों को रिकॉर्ड करती हैं।
क्या है एग्री स्टैक प्लेटफॉर्म?
सरकार एग्री स्टैक प्लेटफॉर्म के जरिए यूरिया की बिक्री को धीरे-धीरे इंटीग्रेट करने की योजना पर काम कर रही है। बहुत से लोगों के मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि आखिर यह एग्री स्टैक प्लेटफॉर्म क्या है?
एग्री स्टैक सरकार द्वारा बनाया जा रहा एक डिजिटल फाउंडेशन है, जिसका मकसद भारत में खेती को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साथ लाना और डेटा और डिजिटल सर्विसेज का इस्तेमाल करके किसानों के लिए बेहतर नतीजे और परिणाम देना है।
















