छत्तीसगढ़ सहित देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। सरकार द्वारा तय समयसीमा को देखते हुए अब कार्रवाई और आक्रामक कर दी गई है। डेडलाइन से पहले बचे करीब दो महीनों में सुरक्षाबल नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में बीते 24 घंटों के भीतर सुरक्षाबलों को अहम सफलता मिली है, हालांकि इस दौरान एक जवान के शहीद होने से माहौल शोकपूर्ण हो गया।
मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए, एक जवान शहीद
छत्तीसगढ़ सीमा से लगे महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले में गुरुवार शाम सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच जोरदार मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में तीन नक्सली मारे गए, जबकि एक पुलिस जवान ने देश की सेवा करते हुए वीरगति पाई। मुठभेड़ स्थल से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है। फिलहाल मारे गए नक्सलियों की पहचान की जा रही है।
बीजापुर में 12 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
इसी बीच छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से भी सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। यहां गुरुवार को 12 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ये नक्सली ‘पूना मारगेम’ अभियान से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लेकर सामने आए हैं।
54 लाख रुपये के इनामी नक्सलियों ने छोड़ा हथियार
आत्मसमर्पण करने वाले इन 12 माओवादियों पर कुल 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उन्होंने अपने हथियार भी सुरक्षाबलों को सौंप दिए हैं, जिनमें AK-47, SLR राइफल और बड़ी संख्या में कारतूस शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सभी नक्सली साउथ सब-ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े हुए थे।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा दी जाएगी, ताकि वे सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकें। अधिकारियों का कहना है कि लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों और विकास कार्यों के चलते नक्सलियों का मनोबल कमजोर पड़ रहा है।
सुरक्षाबलों के अनुसार, आने वाले दिनों में नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान और तेज किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य तय समयसीमा के भीतर नक्सलवाद पर पूरी तरह नियंत्रण कर इन क्षेत्रों में शांति और विकास को मजबूती देना है।
















