भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच घोषित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को भारतीय उद्योग जगत ने बड़ा कदम बताया है। उद्योग संगठनों का मानना है कि यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए अहम साबित होगा।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इस एफटीए को ‘गेम-चेंजर’ करार देते हुए कहा कि यह भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत भारतीय निर्यात को 99 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर विशेष प्राथमिकता मिलेगी।
बनर्जी के अनुसार, इससे भारतीय उद्योगों को यूरोप के उच्च-मूल्य वाले बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का अवसर मिलेगा। साथ ही इस समझौते से निवेश, तकनीक के आदान-प्रदान और उत्पादन क्षमता में भी तेजी आने की उम्मीद है।

इन उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा
इस मुक्त व्यापार समझौते से कई प्रमुख उद्योगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। उद्योग जगत के अनुसार वस्त्र और परिधान, चमड़ा व फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य, आईटी तथा प्रोफेशनल सेवाओं जैसे क्षेत्रों को इससे खास फायदा होगा। यह समझौता श्रम-प्रधान उद्योगों और एमएसएमई के लिए भी ठोस अवसर लेकर आएगा। साथ ही भारतीय पेशेवरों के लिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहतर गतिशीलता ढांचा तैयार होगा।
फिक्की ने बताया बड़ी उपलब्धि
फिक्की के अध्यक्ष आनंद गोयनका ने इस समझौते को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ यह करार हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए एफटीए समझौतों में सबसे व्यापक और संभावनाओं से भरपूर है।

यूरोपीय संघ भारत के लिए बड़ा बाजार
गोयनका के अनुसार यूरोपीय संघ भारत के लिए सबसे बड़ा और उच्च क्षमता वाला बाजार है। इस समझौते से नए व्यापार और निवेश के रास्ते खुलेंगे। इससे विनिर्माण और उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को मजबूती मिलेगी और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भागीदारी और गहरी होगी
फिक्की का मानना है कि यह एफटीए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा और दीर्घकालिक व समावेशी विकास को गति देगा।
















