पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन के दौरान गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। इसी कड़ी में आयोग ने उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट-2 ब्लॉक के प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) सुमित्रप्रतिम प्रधान को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है।
मुख्य सचिव को सख्त निर्देश
चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र भेजकर सुमित्रप्रतिम प्रधान के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि अधिकारी को न सिर्फ निलंबित किया जाए, बल्कि मतदाता सूची से जुड़े सभी कार्यों से तुरंत हटाया जाए।
इसके साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग ने इन आदेशों के पालन की रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर देने को कहा है।
अवैध नियुक्तियों पर कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने संबंधित अधिकारी द्वारा की गई सभी सुनवाइयों को रद्द कर दिया है। आरोप है कि बीडीओ सुमित्रप्रतिम प्रधान ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियमों के खिलाफ 11 सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त एईआरओ नियुक्त किया था।
इन कर्मचारियों द्वारा मतदाता सूची संशोधन को लेकर की गई सभी सुनवाइयों को अवैध घोषित कर दिया गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को निर्देश दिया गया है कि अब ये सुनवाइयां नए सिरे से और अधिकृत अधिकारियों की निगरानी में कराई जाएंगी।
लापरवाही पर सख्त चेतावनी
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की जानबूझकर की गई गलती या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी पाए जाने पर दोषी व्यक्ति को तीन महीने से लेकर दो साल तक की जेल और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामलों में राज्य के चार अन्य अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश दिए थे।
















