छत्तीसगढ़ में गरीब बच्चों की पढ़ाई को लेकर फिर हलचल तेज हो गई है. गांव-शहर के अभिभावक अब RTE के तहत अपने बच्चों का दाखिला करवाने के लिए स्कूलों के चक्कर लगा रहे हैं. साल 2010 से लागू इस कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं. लेकिन इस बार कई निजी स्कूल फीस बढ़ाने की मांग को लेकर एकजुट हो गए हैं. सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि अगर बच्चों को प्रवेश नहीं दिया गया, तो स्कूलों की मान्यता तक रद्द हो सकती है.
वहीं प्रदेश सरकार का कहना है कि सभी बच्चों को पढ़ाई का अधिकार मिलना चाहिए. चाहे वह किसी भी परिवार से आता हो. सीएम साय के नेतृत्व में सरकार लगातार कोशिश कर रही है, कि गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके. इसके बावजूद कई निजी स्कूल आरटीई के तहत एडमिशन देने से बच रहे हैं. इसको लेकर स्कूल प्रबंधन का कहना है कि जब तक सरकार फीस की प्रतिपूर्ति नहीं बढ़ाएगी, तब तक वे दाखिला नहीं देंगे. इससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है. कई जगहों पर इसको लेकर नाराजगी भी देखने को मिली है
कितनी सीटें अनिवार्य हैं ?
आरटीई नियमों के मुताबिक, हर प्राइवेट स्कूलों को नर्सरी या पहली कक्षा में 25 फीसदी सीटें आरक्षित रखना बहुत जरूरी है. इन सीटों पर आसपास के इलाके गरीब और वंचित बच्चों को प्रवेश दिया जाता है. इसके बदले में सरकार स्कूलों को प्रति बच्चे के हिसाब से पैसा देती है. यह राशि सरकारी स्कूल में होने वाले खर्च या निजी स्कूल की फीस में से जो कम हो, उसी आधार पर तय होती है. यानी स्कूलों को नुकसान न हो. इसका भी ध्यान रखा जाता है, लेकिन फिर भी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.
बता दें कि छत्तीसगढ़ में पिछले कई सालों से सरकार तय दर पर स्कूलों को पैसा दे रही है. कक्षा 1 से 5 तक हर बच्चे के लिए करीब 7 हजार रुपए और 6 से 8 तक 11400 रुपए सालाना दिए जाते हैं. वहीं आसपास के राज्यों से तुलना करें, तो यह राशि कई जगहों से ज्यादा या बराबर है. इसके बावजूद निजी स्कूल इसे कम बता रहे हैं. फिलहाल, प्रदेश के हजारों निजी स्कूलों में लाखों बच्चे आरटीई के तहत पढ़ाई कर रहे हैं. इस साल भी हजारों सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया चल रही है.
शिक्षा विभाग की अपील
वहीं सरकार ने भी साफ कर दिया है कि नियमों का पालन करना सभी निजी स्कूलों की जिम्मेदारी है. अगर कोई भी स्कूल आरटीई के तहत बच्चों को एडमिशन नहीं देता है या फिर एडमिशन प्रक्रिया में किसी भी तरह की अड़चन डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसमें स्कूलों की मान्यता को भी खत्म करने तक प्रावधान है. वहीं शिक्षा विभाग की तरफ से लोगों से अपील की गई है, कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें. सही जानकारी के लिए सरकारी सोर्स पर ही भरोसा करें
कितनी सीटें अनिवार्य हैं ?
आरटीई नियमों के मुताबिक, हर प्राइवेट स्कूलों को नर्सरी या पहली कक्षा में 25 फीसदी सीटें आरक्षित रखना बहुत जरूरी है. इन सीटों पर आसपास के इलाके गरीब और वंचित बच्चों को प्रवेश दिया जाता है. इसके बदले में सरकार स्कूलों को प्रति बच्चे के हिसाब से पैसा देती है. यह राशि सरकारी स्कूल में होने वाले खर्च या निजी स्कूल की फीस में से जो कम हो, उसी आधार पर तय होती है. यानी स्कूलों को नुकसान न हो. इसका भी ध्यान रखा जाता है, लेकिन फिर भी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.
बता दें कि छत्तीसगढ़ में पिछले कई सालों से सरकार तय दर पर स्कूलों को पैसा दे रही है. कक्षा 1 से 5 तक हर बच्चे के लिए करीब 7 हजार रुपए और 6 से 8 तक 11400 रुपए सालाना दिए जाते हैं. वहीं आसपास के राज्यों से तुलना करें, तो यह राशि कई जगहों से ज्यादा या बराबर है. इसके बावजूद निजी स्कूल इसे कम बता रहे हैं. फिलहाल, प्रदेश के हजारों निजी स्कूलों में लाखों बच्चे आरटीई के तहत पढ़ाई कर रहे हैं. इस साल भी हजारों सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया चल रही है.
शिक्षा विभाग की अपील
वहीं सरकार ने भी साफ कर दिया है कि नियमों का पालन करना सभी निजी स्कूलों की जिम्मेदारी है. अगर कोई भी स्कूल आरटीई के तहत बच्चों को एडमिशन नहीं देता है या फिर एडमिशन प्रक्रिया में किसी भी तरह की अड़चन डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसमें स्कूलों की मान्यता को भी खत्म करने तक प्रावधान है. वहीं शिक्षा विभाग की तरफ से लोगों से अपील की गई है, कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें. सही जानकारी के लिए सरकारी सोर्स पर ही भरोसा करें
शहर जिला अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन और पूर्व महापौर प्रमोद दुबे के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में सैकड़ों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार महज 100 करोड़ रुपये की बचत के लिए गरीब बच्चों के भविष्य से समझौता कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस निर्णय से 75 हजार से अधिक बच्चे प्रभावित होंगे, जो अब प्रारंभिक शिक्षा के अधिकार से वंचित हो जाएंगे। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो वे प्रदेश के शिक्षा मंत्री का घेराव करेंगे और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।















